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हिंदू धर्म के संस्थापक कौन थे, सनातन धर्म के संस्थापक कौन थे (Hindu Dharm Ke Sansthapak Kaun The)

Hindu Dharm Ke Sansthapak Kaun The – धर्म का अर्थ है सही कार्य करना या अपने कर्तव्य पथ पर चलना। सरल शब्दों में धर्म को नियम भी कहा जा सकता है। हर धर्म के अपने विशेष नियम और रीति-रिवाज होते हैं। जिससे उस धर्म को एक अलग पहचान मिलती है। दुनिया में कई धर्म हैं जैसे हिंदू धर्म, इस्लाम धर्म, सिख धर्म और ईसाई धर्म आदि।

लेकिन इन सभी धर्मो में हिंदू धर्म सबसे पुराना है। हिंदी धर्म, जिसे सनातन धर्म के नाम से जाना जाता है, दुनिया के सबसे पुराने धर्मों में से एक है। यह धर्म जितना प्राचीन है उतना ही वैज्ञानिक भी।

आज के इस लेख में हम आपको हिंदू धर्म के संस्थापक कौन थे के साथ साथ कुछ ऐसी बातें भी बताने वाले है, जिसके बारे में शायद ही आप जानते होंगे। तो आइये जानते है –

हिंदू धर्म के संस्थापक कौन थे / सनातन धर्म के संस्थापक कौन थे (Sanatan Dharm Ke Sansthapak Kaun The)

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हिंदू धर्म का कोई संस्थापक नहीं है। अधिकांश धर्मों के संस्थापक है, लेकिन हिंदू धर्म का कोई संस्थापक नहीं है। दुनिया के सबसे पुराने धर्म हिंदू धर्म का कोई पिता नहीं है। हिंदू धर्म दुनिया का सबसे प्राचीन धर्म है, जिसे सनातन धर्म भी कहा जाता है।

हिंदू धर्म दुनिया तीसरा सबसे बड़ा धर्म है। ईसाई धर्म और इस्लाम धर्म के बाद सबसे ज्यादा लोग हिंदू धर्म को मानते हैं। हिंदू धर्म का सबसे बड़ा वर्ग यानी 90% हिंदू भारत में रहते हैं। हिंदू धर्म को बहुत खास माना जाता है और लोग हिंदू धर्म से काफी प्रभावित भी हो रहे हैं।

हिंदू धर्म में चार युग सत्ययुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग शामिल हैं। और अभी कलियुग चल रहा हैं। ऐसा कहा जाता है कि कलियुग के अंत में ब्रह्मांड में कुछ भी नहीं बचेगा।

हिंदू धर्म को मानने वाले लोगों के जीवन के 4 लक्ष्य होते हैं। इसमें धर्म (धार्मिकता), अर्थ (धन का साधन), काम (सही इच्छाएं) और मोक्ष शामिल हैं।

हिंदू धर्म को मानने वाला हर व्यक्ति इन्हीं चीजों के तहत अपना जीवन व्यतीत करता है। हिंदू धर्म के लक्ष्य पूरी तरह से अलग हैं और आखिरी लक्ष्य ब्रह्म के साथ एक होकर पुनर्जन्म के चक्र को छोड़ना है।

हिन्दू धर्म के बारे में (About Hindu Dharm In Hindi)

हिन्दू धर्म का एकमात्र धर्मग्रन्थ वेद है। वेद के चार भाग हैं ऋग, यजु, साम और अथर्व। वेदों के दर्शन को ही उपनिषद कहा जाता है जिनकी संख्या लगभग 108 है। वेद के अंग वेदांग कहलाते हैं जो छह हैं – शिक्षा, कल्प, व्याकरण, ज्योतिष, छंद और निरुक्त।

वेदों और उपनिषदों का सार गीता में है, इसीलिए गीता को भी धार्मिक ग्रंथ की श्रेणी में रखा गया है जो महाभारत का एक हिस्सा है।

वेदों के अनुसार ईश्वर एक ही है, उसका नाम ब्रह्म (ब्रह्मा नहीं) है। उसे ईश्वर, परमात्मा, परमपिता, परब्रह्म आदि कहा जाता है। वह निराकार, अजन्मा, अव्यक्त, अप्रकट, आदि और अनन्त है। सभी देवी, देवता, पितर, ऋषि – मुनि आदि उनका ध्यान और प्रार्थना करते हैं।

विद्वानों के अनुसार हिन्दू धर्म लगभग 90 हजार वर्षों से निरंतर चला आ रहा है। नाम बदले, रूप बदले, परंपराएं बदलीं, लेकिन ज्ञान नहीं बदला, देवता नहीं बदले और तीर्थ भी नहीं बदले।

हिन्दू धर्म में संध्यावंदन और ध्यान का बहुत महत्व है। हिन्दू धर्म जीवन जीने की एक शैली है। योग, आयुर्वेद और व्रत के नियम अपनाकर आप सदैव स्वस्थ और प्रसन्न रह सकते हैं। इसमें भोजन, पानी, नींद, ध्यान, क्रिया, मन, बुद्धि और विचारों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी शामिल है जिसे आज विज्ञान भी स्वीकार करता है।

हिन्दू धर्म के अनुसार जीवन का लक्ष्य मोक्ष है। मोक्ष का अर्थ है ज्ञान प्राप्त करना, आत्मज्ञान प्राप्त करना या स्वयं को ऐसी स्थिति में लाना जहां कोई व्यक्ति जन्म और मृत्यु से परे हो और अपनी इच्छा के अनुसार जन्म और मृत्यु ले सके।

FAQs

दुनिया का पहला हिंदू कौन है?
दुनिया का पहला हिंदू स्वायंभुव मनु है।

हिन्दू धर्म का इतिहास क्या है?
हिन्दू धर्म ज्ञात रूप से लगभग 12000 वर्ष पुराना है, और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार हिंदू धर्म 90 हजार वर्ष पुराना है।

हिंदू धर्म में कुल कितने शास्त्र हैं?
हिंदू धर्म में 6 शास्त्र हैं।

पृथ्वी का पहला धर्म कौन सा है?
पृथ्वी का पहला धर्म सनातन धर्म है।

क्या रामायण में हिंदू शब्द है?
नहीं, रामायण में हिंदू शब्द नहीं है।

निष्कर्ष (Conclusion)

आज के इस लेख में हमने आपको हिंदू धर्म के संस्थापक कौन थे (Hindu Dharm Ke Sansthapak Kaun The) आदि के बारे में जानकारी दी है। हमे उम्मीद है आपको यह लेख अच्छा लगा होगा। अगर आपको यह लेख सनातन धर्म के संस्थापक कौन थे (Sanatan Dharm Ke Sansthapak Kaun The) अच्छा लगा है तो इसे अपनों के साथ भी शेयर करे।

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