Rakshabandhan 2023: किस दिन है रक्षाबंधन, जानिये तिथि, शुभ मुहूर्त और राखी बांधने का सही तरीका

Rakshabandhan Date 2023 | Raksha Bandhan Date 2023: हिंदू कैलेंडर के अनुसार रक्षाबंधन का पर्व श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने प्यारे भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और रक्षा का वचन लेती हैं। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनके सुखी और लंबे जीवन की कामना करती हैं। वहीं भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं और जीवन भर उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं। यह त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम और रिश्ते का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं की बात करें तो यमुना ने अपने भाई यमराज की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा था। जिसके बाद यमराज ने उन्हें अमरता का वरदान दिया। जानिए साल 2022 में कब है रक्षाबंधन, साथ ही जानिए इसका महत्व।

Rakshabandhan Date 2023

Included

  • रक्षा बंधन 2022 शुभ मुहूर्त और तिथि
  • रक्षाबंधन का धार्मिक महत्व
  • इस विधि से बांधें भाई की कलाई पर राखी
  • भद्राकाल में न बंधे राखी
  • मुहूर्त खत्म होने पर क्या करें?
  • ऐसे बांधें राखी
  • बहनों के लिए बेहद खास है रक्षाबंधन
  • पवित्र धागे का महत्व
  • रक्षाबंधन त्योहार को मनाने के पीछे की कथा
  • इन 5 चीजों के बिना अधूरा रहेगा रक्षाबंधन
  • इन पांच देवताओं को बांधें राखी
  • भूलकर भी न करें ये काम
  • उपाय

Rakshabandhan Date 2023

रक्षा बंधन 2022 शुभ मुहूर्त और तिथि

साल 2023 में रक्षा बंधन का शुभ मुहूर्त गुरुवार 11 अगस्त 2023 को सुबह 10.38 बजे से शुरू होकर 12 अगस्त 2023 शुक्रवार को सुबह 7.05 बजे समाप्त होगा।

रक्षाबंधन की तिथि – 11 अगस्त 2022, दिन – गुरुवार
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ – 11 अगस्त 2022 सुबह 10:38 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त – 12 अगस्त 2022 सुबह 7.05 बजे तक

शुभ मुहूर्त – 11 अगस्त सुबह 9.28 बजे से रात 9.14 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:6 बजे से दोपहर 12:57 बजे तक
अमृत ​​काल – शाम 6:55 बजे से रात 8.20 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04:29 से 5:17 बजे तक
राहुकाल – दोपहर 2:8 बजे से दोपहर 3.45 बजे तक

रक्षा बंधन भद्रा समाप्ति समय – 08 बजकर 51 मिनट पर
रक्षा बंधन में भद्रा पूंछ 05 बजकर 17 मिनट से 06 बजकर 18 मिनट तक
रक्षा बंधन में भाद्र मुख 06 बजकर 18 मिनट से 08:00 बजे तक

साथ ही अबकी बार रक्षा बंधन का शुभ मुहूर्त सुबह 9.28 बजे रात 9.14 बजे तक रहेगा।

रक्षाबंधन का धार्मिक महत्व

पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान विष्णु राजा बलि को वचन देकर पाताल लोक चले गए थे। तो माता लक्ष्मी ने राजा बलि को धागा बांधकर भगवान विष्णु को उपहार स्वरुप माँगा था। जिस दिन यह हुआ वह श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि थी। इसीलिए इस दिन से बहनों द्वारा भाइयों को राखी बांधने की परंपरा शुरू हुई।

इस विधि से बांधें भाई की कलाई पर राखी

रक्षाबंधन के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर की साफ-सफाई करें और चावल के आटे का चौक पूरकर मिट्टी के छोटे से घड़े की स्थापना करें। चावल, कच्चा सूती कपड़ा, सरसों, रोली एक साथ मिला लें। फिर पूजा की थाली तैयार करें और दीप प्रज्ज्वलित करें। मिठाई को प्लेट में रखें। इसके बाद भाई को पीढ़े पर बिठाएं। पीढ़ा आम की लकड़ी का हो तो अच्छा है। रक्षा सूत्र बांधते समय भाई को पूर्व दिशा में बिठाएं। भाई को तिलक लगाते समय बहन का मुख पश्चिम की ओर होना चाहिए। इसके बाद भाई के माथे पर टीका लगाएं और दाहिने हाथ पर रक्षा सूत्र बांधें। राखी बांधने के बाद भाई की आरती करें और फिर मिठाई खिलाएं। अगर बहन बड़ी है तो छोटे भाई को आशीर्वाद दें और अगर आप छोटे हैं तो अपने बड़े भाई को प्रणाम करें।

भद्राकाल में न बंधे राखी

ज्योतिषियों के अनुसार भद्रा काल में राखी बांधना अशुभ होता है। दरअसल शास्त्रों में राहुकाल और भद्रा के समय में शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा में राखी न बांधने का कारण यह है कि लंकापति रावण ने अपनी बहन को भद्रा में राखी बांधी और एक साल के भीतर ही उसका नाश हो गया । इसलिए इस समय को छोड़कर बहनें अपने भाई को राखी बांधती हैं। वहीं यह भी कहा जाता है कि भद्रा शनि महाराज की बहन हैं। उन्हें ब्रह्माजी ने श्राप दिया था कि जो भी भद्रा में शुभ कार्य करेगा उसे अशुभ फल मिलेगा। इसके अलावा राहुकाल में भी राखी नहीं बांधी जाती है।

मुहूर्त खत्म होने पर क्या करें?

रक्षाबंधन के दिन शुभ मुहूर्त में राखी बांधने से शुभ फल मिलते हैं। लेकिन कई बार बहनें किसी काम की वजह से समय पर राखी नहीं बांध पाती हैं, इसलिए ये काम कर सकती हैं। लेकिन साथ ही यह भी जान लें कि अगर रक्षाबंधन का सही समय बीत जाता है तो क्या उपाय करने चाहिए। अगर रक्षाबंधन का मुहूर्त निकल गया है तो बहनें इन आसान उपायों को अपना सकती हैं और अमंगल को मंगल में परिवर्तित कर सकती हैं।

भगवान शिव की मूर्ति, चित्र या शिवलिंग पर राखी चढ़ाएं। इसके बाद महामृत्युंजय मंत्र की एक माला (108 बार) जाप करें। इसके बाद भाइयों की कलाई पर भगवान शिव को अर्पित रक्षा सूत्र बांधें। भगवान शिव की कृपा और महामृत्युंजय मंत्र के प्रभाव से सब कुछ शुभ रहेगा।

ऐसे बांधें राखी

भगवान शिव की मूर्ति, चित्र या शिवलिंग पर राखी चढ़ाएं। फिर महामृत्युंजय मंत्र की एक माला (108 बार) जाप करें। इसके बाद भगवान शिव को अर्पित किए गए रक्षा सूत्र को दाहिने हाथ में भाइयों की कलाई पर बांधें। तिलक लगाकर भाई की आरती करें। भाई को मिठाई खिलाये। भगवान शिव की कृपा, महामृत्युंजय मंत्र और श्रावण सोमवार के प्रभाव से सब कुछ शुभ रहेगा। राखी बांधने के बाद भाइयों को अपनी इच्छा और क्षमता के अनुसार बहनों को उपहार देना चाहिए।

बहनों के लिए बेहद खास है रक्षाबंधन

रक्षाबंधन के दिन हर बहन अपने भाई की लंबी उम्र के लिए भगवान से प्रार्थना करती है और भगवान को प्रसन्न करती है और भाई के जीवन में खुशियों की प्रार्थना करती है। इस दिन बहनें मंदिर जाती हैं और भगवान कृष्ण की पूजा करती हैं। अपने भाई की रक्षा के लिए भगवान से प्रार्थना करती है। रक्षाबंधन के दिन बहन अपने भाई को राखी बांधती है। इसी प्रकार भाई भी अपनी बहन की रक्षा का वचन देकर सुन्दर उपहार देते हैं।

पवित्र धागे का महत्व

बहन भाई के हाथ में पवित्र धागा बांधती है। भाई जीवन भर उसकी रक्षा करने का वचन देता है। यह कोई परंपरा नहीं बल्कि एक बहुत ही पवित्र बंधन है, जो संस्कारों को भी एक धागे में लपेट रहा है। वे संस्कार जो एक बहन के लिए एक भाई और एक भाई के लिए एक बहन के प्यार को बढ़ाते हैं। पेड़ों पर रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। महिलाएं बरगद के पेड़ को धागे से लपेटती हैं, रोली, चंदन, धूप और दीपक से उनकी पूजा करती हैं और अपने पति की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती हैं। ऐसे ही कई पेड़ों को धागे से लपेटने की मान्यता है। इसी तरह बहन के बंधे धागे में इतनी शक्ति होती है कि वह भाई के जीवन में खुशियां भर देता है।

रक्षाबंधन त्योहार को मनाने के पीछे की कथा

यमराज और यमुना से जुडी कथा के अनुसार – रक्षाबंधन से जुड़ी एक कथा है, जिसके अनुसार मृत्यु के देवता यमराज और यमुना भाई-बहन है। एक बार यमुना ने अपने भाई यमराज को रक्षासूत्र बांधकर लंबी आयु का आशीर्वाद दिया। तब से हर श्रावण पूर्णिमा पर यह परंपरा चली आ रही है।

लक्ष्मीजी और राजा बलि से जुडी कथा के अनुसार – शास्त्रों के अनुसार दैत्यों के राजा बलि ने अपने बल और पराक्रम से तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया था। राजा बलि के इस पराक्रम को देखकर स्वर्ग के राजा इंद्रदेव घबरा गए और मदद के लिए भगवान विष्णु के पास पहुंचे। इंद्र की प्रार्थना को स्वीकार करते हुए, भगवान विष्णु ने वामन का रूप धारण किया और राजा बलि से भिक्षा मांगने के लिए चले गए। भगवान वामन ने दानवीर बलि से तीन पग भूमि मांगी। अपने पहले और दूसरे चरण में, भगवान वामन ने पृथ्वी और आकाश को माप लिया। इसके बाद तीसरा पग रखने के लिए कुछ नहीं बचा तो राजा बलि ने तीसरा पग अपने सिर पर रखने को कहा। भगवान वामन ने वैसा ही किया। इस तरह देवताओं की दुविधा समाप्त हो गई और साथ ही बलि के दान से भगवान बहुत प्रसन्न हुए। जब उन्होंने राजा बलि से वरदान मांगने को कहा तो बलि ने उनसे पाताल लोक में बसने का वरदान मांगा। राजा की इच्छा पूरी करने के लिए भगवान विष्णु को पाताल लोक जाना पड़ा। इससे सभी देवी-देवता और माता लक्ष्मी चिंतित हो गए। अपने पति को वापस लाने के लिए, माता लक्ष्मी ने एक गरीब महिला का रूप धारण किया और राजा बलि के पास पहुंची और उन्हें अपने भाई के रूप में राखी बांधी। बदले में, उसने भगवान विष्णु को पाताल लोक से लेने जाने का वचन मांगा। उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा थी और मान्यता है कि तभी से रक्षाबंधन मनाया जाता है।

इंद्र और इन्द्राणी से जुडी कथा के अनुसार – भविष्य पुराण के अनुसार, एक बार देवताओं और राक्षसों के बीच 12 साल तक युद्ध हुआ लेकिन देवता जीत नहीं सके। अपनी हार के डर से दुखी होकर इंद्र देवगुरु बृहस्पति के पास गए। उनके सुझाव पर, इंद्र की पत्नी ने श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के दिन व्रत रखकर रक्षा सूत्र तैयार किया। इसके बाद उन्होंने इंद्र की दाहिनी कलाई पर रक्षा सूत्र बांध दिया और सभी देवता राक्षसों पर विजयी हुए। तभी से विजय की कामना के लिए रक्षासूत्र बांधने की परंपरा शुरू हुई।

द्रौपदी और कृष्णजी से जुडी कथा के अनुसार – शास्त्रों में कृष्ण और द्रौपदी का वर्णन है। जब कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया तो उनकी अंगुली में चोट लग गई। उस समय द्रौपदी ने अपनी साड़ी फाड़ दी और उसे श्रीकृष्ण की उंगली पर पट्टी की तरह बांध दिया। श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था। बाद में श्रीकृष्ण ने द्रौपदी के चीर-हरण के समय उसकी लाज बचाकर भाई का धर्म निभाया।

इन 5 चीजों के बिना अधूरा रहेगा रक्षाबंधन

राखी: रक्षाबंधन के त्योहार में सबसे खास चीज राखी होती है। इसलिए बहनों को पूजा की थाली में राखी जरूर रखनी चाहिए। हो सके तो राखी का रंग राशि के अनुसार हो तो बहुत अच्छा रहेगा।

रोली या हल्दी पाउडर: राखी बांधते समय बहनें सबसे पहले अपने भाइयों को तिलक लगाती हैं। ऐसे में तिलक लगाने के लिए रोली का होना बहुत जरूरी है। रोली की जगह हल्दी पाउडर से भी तिलक लगाया जा सकता है। रक्षाबंधन के दिन पूजा की थाली में रोली रखें।

अक्षत {साबुत चावल}: तिलक लगाने के बाद माथे पर चावल भी लगाया जाता है। इसे अक्षत भी कहते हैं। ध्यान रहे कि चावल टूटे नहीं। रक्षाबंधन के दिन पूजा की थाली में चावल जरूर रखें।

आरती के लिए दीपक: रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाइयों की आरती करती हैं। आरती करने के लिए पूजा की थाली में दीपक का होना बहुत जरूरी है। तो राखी इसके बिना अधूरी होगी।

मिठाई: रक्षाबंधन के पावन अवसर पर बहनें अपने भाइयों को मिठाई खिलाती हैं। इसके लिए पूजा की थाली में मिठाई का होना जरूरी है।

इन पांच देवताओं को बांधें राखी

रक्षा बंधन पर पूजनीयों को राखी बांधने का विधान है। इस बार भाई से पूर्व इन 5 देवताओं को राखी बांधें और परिवार के सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लें।

गणेश जी – सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। कोई भी शुभ कार्य करने से पहले गणेश जी का स्मरण किया जाता है। इसलिए रक्षा बंधन के दिन भी सबसे पहले गणेश जी को राखी बांधनी चाहिए।

शिव – सावन का महीना शिव का माना जाता है। सावन में पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। इसलिए इस दिन भगवान शिव को राखी बांधनी चाहिए।

हनुमान जी – हनुमान जी को शिव का रुद्रावतार माना जाता है। कहा जाता है कि जब सभी देवता सो जाते हैं तो कुछ समय बाद शिव भी सो जाते हैं। तब वह रुद्रावतार सृष्टि का संचालन करता है। यही कारण है कि सावन के महीने में हनुमान जी की विशेष पूजा की जाती है। यदि आप इस दिन हनुमानजी को राखी बांधते हैं, तो आप सभी संकटों से बच जाएंगे।

कान्हा जी – जब श्रीकृष्ण ने शिशुपाल का वध किया था, तब उनके हाथ खून में सन गए थे। तब द्रौपदी ने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर कृष्ण के हाथ में बांध दिया। बदले में, श्री कृष्ण ने संकट के समय में द्रौपदी की मदद करने का वादा किया हैं। इसके अलावा, यह भी माना जाता है कि जब युधिष्ठिर ने कृष्ण से पूछा कि वे सभी परेशानियों को कैसे दूर कर सकते हैं, तो कृष्ण जी ने उन्हें रक्षा बंधन का त्योहार बनाने की सलाह दी। सावन के महीने में भगवान कृष्ण की विशेष पूजा भी की जाती है।

नाग देवता – रक्षाबंधन के दिन नाग देवता को राखी बांधने से सर्प योग का नाश होता है। इसलिए इस दिन नाग देवता को राखी बांधनी चाहिए।

भूलकर भी न करें ये काम

राखी हमेशा शुभ मुहूर्त में बांधनी चाहिए। भद्रा या राहु काल में कभी भी राखी नहीं बांधनी चाहिए। ये दोनों समय अशुभ माने जाते हैं।

रक्षाबंधन के दिन काले रंग का धागा नहीं बांधना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि यह रंग नकारात्मकता के प्रभाव को बढ़ाता है। इसलिए इस रंग का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

राखी बांधते समय दिशा का विशेष ध्यान रखें। राखी बांधते समय भाई का मुंह दक्षिण दिशा में नहीं होना चाहिए। बल्कि पूर्व या उत्तर दिशा में होना बेहतर है।

रक्षाबंधन के दिन भाई-बहन एक-दूसरे को रुमाल और तौलिया उपहार में नहीं देना चाहिए। यह अच्छा शगुन नहीं है। इसके अलावा इस खास दिन पर बहनों को नुकीली या धारदार चीजें गिफ्ट न करें। इस दिन दर्पण और फोटो फ्रेम जैसे उपहारों से भी बचना चाहिए।

भाई को तिलक लगाते समय अक्षत के लिए खड़े चावल का प्रयोग करें। इसमें टूटे चावल का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

उपाय

1- रक्षाबंधन के दिन अपनी बहन के हाथ से एक छाता, सुपारी और चांदी का सिक्का गुलाबी कपड़े में लेकर घर की तिजोरी या पूजा स्थल पर रख दें। इससे मां लक्ष्मी की अपार कृपा होगी। घर में धन और समृद्धि में वृद्धि होगी।

2. रक्षा बंधन के दिन बहनों को सबसे पहले गुलाबी सुगंधित राखी मां के चरणों में अर्पित करनी चाहिए। फिर भाई की कलाई पर बांध दें। ऐसा करने से आपके भाई के धन से जुड़ी सभी परेशानियां दूर हो जाएंगी।

3- रक्षा बंधन का पर्व सावन की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यदि आप सावन पूर्णिमा के दिन दूध की खीर और बताशा या सफेद मिठाई चंद्रमा को अर्पित करते हैं, तो ऐसा माना जाता है कि इससे आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

4- रक्षाबंधन यानी सावन पूर्णिमा के दिन ‘ॐ सोमेश्वराय नम:’ मंत्र का जाप कर दूध का दान करें, तो कुंडली में व्याप्त चंद्र दोष समाप्त हो जाता है।

5- रक्षाबंधन के दिन गणेश जी को राखी बांधने से भाई-बहन के बीच मनमुटाव समाप्त हो जाता है और आपसी प्रेम और सौहार्द बढ़ता है।

6 – रक्षाबंधन के दिन बहनें बजरंबली जी को राखी बांधें तो भाई-बहन के बीच आने वाली सभी परेशानियां और बाधाएं दूर हो जाती हैं।

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