सॉफ्टवेयर के प्रकार – (Software Kitne Prakar Ke Hote Hai)

कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के प्रकार – (Computer Software Ke Prakar): कोई भी कम्प्यूटेशनल डिवाइस दो भागों से मिलकर बना होता है जिसमें पहला भाग हार्डवेयर होता है जबकि दूसरा भाग सॉफ्टवेयर होता है। इसमें हार्डवेयर उन इलेक्ट्रॉनिक भाग को कहा जाता है जिन्हें हम छू सकते हैं और जो मिलकर एक संपूर्ण कम्प्यूटर सिस्टम का निर्माण करते हैं।

जबकि सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में लिखा गया इंस्ट्रक्शन कहलाता है जो हार्डवेयर को निर्देश देता है। अगर आसान शब्दों में समझें तो कोई सॉफ्टवेयर हार्डवेयर को बताता हैं कि उसे क्या काम करना है। बिना सॉफ्टवेयर वाला कोई भी कंप्यूटर एक बेजान मशीन की तरह है।

अब अगर हम सॉफ्टवेयर के बारे में विस्तार से बात करें तो हम सॉफ्टवेयर को तीन भागों में विभाजित कर सकते हैं, जिसमें पहला सिस्टम सॉफ्टवेयर, दूसरा एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर और तीसरा यूटिलिटी सॉफ्टवेयर।

तो आज के इस लेख में हम आपको सॉफ्टवेयर क्या है और सॉफ्टवेयर के प्रकार के बारे में बताने जा रहे है। अगर आप इससे संबधित सभी जानकारी आसान भाषा में जानना चाहते है तो इसे लेख को अंत तक जरूर पढ़े ।

तो चलिए आपका ज्यादा समय न लेते हुए शुरू करते है और जानते है की सॉफ्टवेयर के प्रकार क्या है या सॉफ्टवेयर कितने प्रकार के होते है (Software Kitne Prakar Ke Hote Hai) –

सॉफ्टवेयर क्या है? (Software Kya Hai)

सॉफ्टवेयर निर्देशों और प्रोग्रामों का एक समूह है जिसका उपयोग कंप्यूटर को चलाने और कंप्यूटर में कार्यो को करने के लिए किया जाता है।

दूसरे शब्दों में, “सॉफ्टवेयर कम्प्यूटर का एक महत्वपूर्ण भाग (इम्पोर्टेन्ट पार्ट) होता है जिसकी सहायता से उपयोगकर्ता कम्प्यूटर पर कार्य करता है।”

हम हाथों से हार्डवेयर को छू सकते हैं और आंखों से देख सकते हैं लेकिन सॉफ्टवेयर को न तो छू सकते हैं और न ही देख सकते हैं।

बिना सॉफ्टवेयर के कम्प्यूटर कोई भी कार्य नहीं कर सकता है। सॉफ्टवेयर कंप्यूटर को निर्देश देता है, यह कंप्यूटर को बताता है कि कौन सा कार्य कब और कैसे करना है।

सॉफ्टवेयर बनाने के लिए कई प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इस्तेमाल किया जाता है जैसे- जावा, सी लैंग्वेज, एंड्राइड और पाइथन आदि।

सॉफ्टवेयर के प्रकार | Types Of Software In Hindi

सॉफ्टवेयर मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं। आइए एक-एक करके इनके बारे में विस्तार से जानते हैं –

  • System Software
  • Application Software
  • Utility Software

1. सिस्टम सॉफ्टवेयर क्या है? (System Software Kya Hai)

सिस्टम सॉफ्टवेयर वह सॉफ्टवेयर होते है जो कंप्यूटर को नियंत्रित और प्रबंधित करता है। सिस्टम सॉफ्टवेयर कंप्यूटर का मुख्य सॉफ्टवेयर है। इसकी मदद से कंप्यूटर स्टार्ट होता है। इसके बिना कंप्यूटर स्टार्ट भी नहीं हो सकता।

आसान शब्दों में “सिस्टम सॉफ़्टवेयर एक प्रकार का कंप्यूटर प्रोग्राम है जो कंप्यूटर और उपयोगकर्ता के बीच इंटरफ़ेस की तरह कार्य करता है।

सिस्टम सॉफ्टवेयर ऐसे सॉफ्टवेयर होते है जो अन्य सॉफ्टवेयर को चलाने के लिए एक प्लेटफॉर्म प्रदान करते है। सिस्टम सॉफ्टवेयर ऐसे प्रोग्राम को कहते हैं जिनका काम कंप्यूटर को चलाना और उसे काम करने योग्य बनाना होता है।

सिस्टम सॉफ्टवेयर को कंप्यूटर सिस्टम का मास्टर सिस्टम और ऑपरेटिंग सिस्टम भी कहा जाता है क्योंकि यह एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर, यूटिलिटी सॉफ्टवेयर और अन्य सॉफ्टवेयर को संचालित करने के लिए एक प्लेटफॉर्म प्रदान करता है।

सिस्टम सॉफ्टवेयर को कंप्यूटर के हार्डवेयर और एप्लिकेशन प्रोग्राम को चलाने के लिए विकसित किया जाता है। इसे लो लेवल सॉफ्टवेयर के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह सॉफ्टवेयर लो लेवल लैंग्वेज के जरिए डेवलप किया जाता है।

सिस्टम सॉफ्टवेयर अन्य सॉफ्टवेयर को एक प्लेटफॉर्म प्रदान करता है जिसकी सहायता से अन्य सॉफ्टवेयर अपना कार्य आसानी से कर पाते हैं।

सिस्टम सॉफ़्टवेयर में सभी ऑपरेटिंग सिस्टम मैक ओएस, लिनक्स, एंड्राइड, माइक्रोसॉफ्ट विंडोज, कम्प्यूटेशनल, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन आदि सर्विस एप्लीकेशन के सॉफ़्टवेयर शामिल हैं।

सिस्टम सॉफ्टवेयर के बिना किसी भी एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर, यूटिलिटी सॉफ्टवेयर या किसी अन्य सॉफ्टवेयर का उपयोग करना संभव नहीं है। सिस्टम सॉफ्टवेयर उपयोगकर्ता को हार्डवेयर और अन्य सॉफ्टवेयर से सीधे इंटरैक्ट करने की अनुमति देता है।

सिस्टम सॉफ्टवेयर के कुछ प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं – (Examples Of System Software In Hindi)

BIOS (BASIC INPUT OUTPUT SYSTEM) – बायोस भी एक प्रकार का सिस्टम सॉफ्टवेयर है जिसके द्वारा आप अपने सिस्टम के ट्रबल सूट, बूट प्रायोरिटी और सिस्टम की आंतरिक सेटिंग्स को बदल सकते हैं।

बूट प्रोग्राम ( Boot Program) – बूटिंग प्रोग्राम कंप्यूटर को चालू करने की एक प्रक्रिया है। इसे हार्डवेयर द्वारा शुरू किया जा सकता है जैसे बटन दबाकर, या सॉफ्टवेयर कमांड द्वारा।

जब एक कंप्यूटर शुरू में संचालित होता है, तो कंप्यूटर के ROM में स्वचालित रूप से कमांड निष्पादित होते हैं जो कंप्यूटर के बूट प्रोग्राम को मेमोरी में लोड करने और उसके निर्देशों को निष्पादित करने का निर्देश देते हैं।

डिवाइस ड्राइवर (Device Driver) – डिवाइस ड्राइवर भी एक प्रकार का सिस्टम सॉफ्टवेयर है, जब भी आप अपने सिस्टम में किसी डिवाइस को कनेक्ट करते हैं, तो वह डिवाइस एक हार्डवेयर होता है जो सीधे आपके सिस्टम के सॉफ्टवेयर से इंटरैक्ट नहीं कर सकता है।

इसके लिए आपके सिस्टम में कुछ ड्राइवर्स का इंस्टॉल होना जरूरी है, कई ऑपरेटिंग सिस्टम्स में जरूरी ड्राइवर्स प्रीइंस्टॉल्ड आते हैं, जो यूजर को अच्छी सुविधा प्रदान करते हैं।

सिस्टम सॉफ्टवेयर के कार्य (Functions Of System Software In Hindi)

  • सिस्टम सॉफ्टवेयर कंप्यूटर के आंतरिक कार्यों को कण्ट्रोल करता है।
  • सिस्टम सॉफ्टवेयर मॉनिटर, प्रिंटर और स्टोरेज डिवाइस को नियंत्रित करता है।
  • सिस्टम सॉफ्टवेयर कंप्यूटर के कार्यों का प्रबंधन करता है ताकि काम करते समय सिस्टम में कोई खराबी न हो।
  • सिस्टम सॉफ्टवेयर कंप्यूटर के संसाधनों को मैनेज करके रखता है।
  • सिस्टम सॉफ्टवेयर हार्डवेयर कंपोनेंट्स के साथ हो रहे कम्युनिकेशन को हैंडल करता है।

सिस्टम सॉफ्टवेयर के लाभ (Advantages Of System Software In Hindi)

  • सिस्टम सॉफ्टवेयर के काम करने की गति बहुत तेज होती है।
  • सिस्टम सॉफ्टवेयर कंप्यूटर को चलाने में मदद करते है।
  • सिस्टम सॉफ्टवेयर सिस्टम के प्रदर्शन को बेहतर बनाने में मदद करता है।
  • सिस्टम सॉफ्टवेयर वायरस का पता लगाने में सक्षम है।
  • सिस्टम सॉफ्टवेयर को हैकर आसानी से हैक नहीं कर सकता है।

सिस्टम सॉफ्टवेयर के नुकसान (Disadvantages Of System Software In Hindi)

  • सिस्टम सॉफ्टवेयर डिजाइन करना बहुत कठिन होता है।
  • सिस्टम सॉफ्टवेयर में हेरफेर करना मुश्किल है।
  • सिस्टम सॉफ्टवेयर को समझना बहुत कठिन है।
  • सिस्टम सॉफ्टवेयर महंगा है।
  • सिस्टम सॉफ्टवेयर को डेवलप करने के लिए डेवलपर्स को लो लेवल लैंग्वेज का ज्ञान होना चाहिए।
  • सिस्टम सॉफ्टवेयर को बनाने में अधिक समय लगता है।

2. एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर क्या है? (Application Software Kya Hai)

एप्लिकेशन सॉफ़्टवेयर का उपयोग करके ऑनलाइन शोध, ग्राफिक डिज़ाइनिंग, गणना और गेम खेल सकते है। इसके अलावा और ऐसे कई अन्य कार्य हैं जो एप्लिकेशन सॉफ़्टवेयर के माध्यम से किए जा सकते हैं।

हम अपने मोबाइल फोन और कंप्यूटर में जितने भी ऐप देखते हैं, वे सभी एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर के उदाहरण हैं।

हम अपने कंप्यूटर या मोबाइल फोन में एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर को आसानी से इंस्टॉल और अनइंस्टॉल कर सकते हैं।

एप्लिकेशन सॉफ़्टवेयर ऐसे सॉफ़्टवेयर होते है जो उपयोगकर्ता के विशेष कार्यों को पूरा करने के लिए विकसित किया जाते है।

सिस्टम सॉफ़्टवेयर केवल अन्य सॉफ़्टवेयर को कार्य करने के लिए प्लेटफ़ॉर्म प्रदान करता है, लेकिन एप्लिकेशन सॉफ़्टवेयर किसी भी विशिष्ट कार्य को पूरा कर सकता है।

एप्लिकेशन सॉफ़्टवेयर वह सॉफ़्टवेयर है जो उपयोगकर्ता को टेक्स्ट दस्तावेज़ बनाने, गेम खेलने, गाने सुनने और वेब ब्राउज़ करने आदि जैसे उपयोगकर्ता-उन्मुख (यूजर- ओरिएंटेड) कार्य करने की अनुमति देता है।

एप्लिकेशन सॉफ़्टवेयर किसी विशेष कार्य को करने के लिए होते हैं, एप्लिकेशन सॉफ़्टवेयर के कुछ उदाहरण एमएस वर्ड, एक्सेल, मोज़िला, क्रोम, वीएलसी आदि हैं।

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के कुछ प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं – (Examples Of Application Software In Hindi)

वर्ड प्रोसेसिंग (Word Processing) – इस वर्ग के अंतर्गत ऐसे एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर आते हैं जिनका उपयोग वर्ल्ड प्रोसेसिंग के लिए किया जाता है। यानी जिसके अंदर आप शब्दों से जुड़े काम कर सकते हैं। वर्ल्ड प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर के कुछ प्रमुख उदाहरण माइक्रोसॉफ्ट वर्ड, वर्डपैड, नोटपैड आदि हैं।

स्प्रेडशीट (Spreadsheet) – ऐसे सॉफ्टवेयर इस वर्ग के अंतर्गत आते है जिसके द्वारा आंकड़ों को Rows और Columns में दर्शाया जा सकता है जिससे गणना करना आसान हो जाता है। स्प्रेडशीट सॉफ्टवेयर का प्रमुख उदाहरण एमएस एक्सेल है।

प्रेजेंटेशन (Presentation) – प्रेजेंटेशन क्लास के अंतर्गत ऐसे सॉफ्टवेयर आते है, जिसके द्वारा आप अपने स्कूल, ऑफिस, बिजनेस या अन्य कार्यों के लिए प्रेजेंटेशन तैयार कर सकते हैं, जिसका प्रमुख उदाहरण है एमएस पॉवरपॉइंट।

वेब ब्राउजर (Web Browser) – वेब ब्राउजर एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर का एक ऐसा वर्ग है जिसके बारे में ज्यादातर लोग जानते हैं। इस वर्ग के अंतर्गत ऐसे सॉफ्टवेयर आते है जिसके माध्यम से उपयोगकर्ता इंटरनेट से जुड़ सकता है। वेब ब्राउजर के कुछ प्रमुख उदाहरण हैं इंटरनेट एक्सप्लोरर, विंडोज 10 में एज, क्रोम , फ़ायरफ़ॉक्स, नेविगेटर, ओपेरा, सफारी इत्यादि।

विकास सॉफ्टवेयर (Development Software) – इस वर्ग के अंतर्गत ऐसे सॉफ्टवेयर आते हैं जिनका उपयोग करके उपयोगकर्ता अपने स्वयं के प्रोग्राम विकसित कर सकता है, इसके प्रमुख उदाहरण टर्बो सी, टर्बो सी ++, एमएसवी, नेटबीन आदि हैं।

शैक्षिक सॉफ्टवेयर (Educational Software) – शैक्षिक सॉफ्टवेयर के अंतर्गत ऐसे सॉफ्टवेयर आते हैं, जिनका उपयोग कर उपयोगकर्ता शिक्षा से संबंधित जानकारी एकत्र कर सकता है। इसका एक प्रमुख उदाहरण MATLAB नामक सॉफ्टवेयर है, जिसकी सहायता से उपयोगकर्ता गणित से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकता है।

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के कार्य (Functions Of Application Software In Hindi)

  • एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर का मुख्य कार्य डाटा और सूचना का प्रबंधन करना है।
  • एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर दस्तावेजों का प्रबंधन करता है।
  • एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर वीडियो बनाने में मदद करता है।
  • एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर गाने चलाने में मदद करता है।
  • एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के जरिए यूजर कंप्यूटर में गेम खेल सकता है।
  • एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर अकाउंटिंग और फाइनेंस को मैनेज करता है।
  • एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट को मैनेज करता है।
  • एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर टेक्स्ट मैसेजिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मदद करता है।

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के लाभ (Advantages Of Application Software In Hindi)

  • एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर यूजर की जरूरत के हिसाब से टास्क पूरा कर सकता है।
  • एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर में वायरस का खतरा कम होता है।
  • लाइसेंस प्राप्त एप्लिकेशन सॉफ़्टवेयर को नियमित रूप से अपडेट किया जाता है जिसके कारण यह सुरक्षित रहता है। उदाहरण के लिए – गूगल प्ले स्टोर में सभी एप्लिकेशन सुरक्षित हैं।

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के नुकसान (Disadvantages Of Application Software In Hindi)

  • एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर को विकसित करने में अधिक खर्च आता है।
  • एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर विकसित करने में काफी समय लगता है।

3. यूटिलिटी सॉफ्टवेयर क्या है? (Utility Software Kya Hai)

यूटिलिटी सॉफ्टवेयर एक प्रकार का कंप्यूटर सॉफ्टवेयर है जिसका काम कंप्यूटर हार्डवेयर, ऑपरेटिंग सिस्टम और एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर को व्यवस्थित करना है।

यूटिलिटी सॉफ्टवेयर का मुख्य कार्य आपके सिस्टम का प्रबंधन करना और सिस्टम पर आने वाली किसी भी समस्या को ठीक करना है।

दूसरे शब्दों में, “यूटिलिटी सॉफ़्टवेयर वह सॉफ़्टवेयर है जिसका उपयोग कंप्यूटर का विश्लेषण, कॉन्फ़िगरेशन, निगरानी और प्रबंधन करने के लिए किया जाता है।”

यूटिलिटी सॉफ्टवेयर कंप्यूटर के कामकाज को मेन्टेन करके रखता है। यूटिलिटी सॉफ्टवेयर कई तरह के कार्य करता है जैसे कंप्यूटर में वायरस का पता लगाना, डेटा का बैकअप लेना, खराब फाइलों को हटाना और डिस्क को मैनेज करना आदि।

यूटिलिटी सॉफ़्टवेयर में ऐसे घटक शामिल होते हैं जो ऑपरेटिंग सिस्टम को यह बताते हैं कि किस स्थिति में कैसे काम करना है।

यह आपके सिस्टम का टूलबॉक्स है। इसके जरिए आप अपने सिस्टम को सॉफ्टवेयर लेवल पर ठीक कर सकते हैं। इससे आप अपने सिस्टम को तेज कर सकते हैं, वायरस और अन्य समस्याओं से बचा सकते हैं, यूटिलिटी सॉफ्टवेयर हमारे कई कामों को आसान बना देता है।

यूटिलिटी सॉफ़्टवेयर का एक प्रमुख उदाहरण एंटीवायरस है, जिसके द्वारा आप अपने कंप्यूटर को वायरस से बचा सकते हैं।

यूटिलिटी सॉफ्टवेयर के कुछ प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं – (Examples Of Utility Software In Hindi)

फाइल मैनेजमेंट टूल (File Management Tool) – विंडोज फाइल एक्सप्लोरर एक फाइल मैनेजमेंट टूल है जिसके द्वारा आप किसी भी फाइल को आसानी से ढूंढ सकते हैं और उसे मूव, कॉपी, डिलीट, रीनेम और बहुत कुछ कर सकते हैं।

कम्प्रेशन टूल (Compression Tool) – यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण टूल है, इस टूल के द्वारा आप किसी भी फॉर्मेट की फाइल जैसे MP3, MP4, JPg आदि का साइज कम कर सकते हैं और कम साइज के साथ शेयर कर सकते हैं। इसके बाद जब भी आप इसे दोबारा इस्तेमाल करना चाहें तो इसे एक्सट्रैक्ट क्र सकते हैं। इसे उदाहरण है – Winzip, Winrar

डिस्क क्लीनअप (Disk Cleanup) – यह भी एक प्रकार का महत्वपूर्ण यूटिलिटी सॉफ्टवेयर है, इससे आप अपने सिस्टम में मौजूद किसी भी डिस्क को क्लीन कर सकते हैं, यह आपके सिस्टम की गति को बढ़ा देता है उदाहरण – क्लीनअपसी क्लीनर।

डिस्क प्रबंधन (Disk Management) – डिस्क प्रबंधन यूटिलिटी के साथ आप अपने ड्राइव को एक नए पार्टीशन में सिंक कर सकते हैं।

बेकअप यूटिलिटी (Backup Utility) – बैकअप यूटिलिटी सॉफ्टवेयर के माध्यम से आप अपनी महत्वपूर्ण फाइलों का बैकअप ले सकते हैं। अगर किसी वजह से वह फाइल आपके द्वारा डिलीट हो जाती है तो आप उन्हें दोबारा अपने सिस्टम में ला सकते हैं।

एंटीवायरस (Antivirus) – एंटीवायरस एक यूटिलिटी सॉफ्टवेयर है जो आपके सिस्टम को बाहरी वायरस के हमले से बचाता है, माइक्रोसॉफ्ट डिफेंडर नेट प्रोटेक्टर, एमसीअफी आदि एंटीवायरस के कुछ प्रमुख उदाहरण हैं।

यूटिलिटी सॉफ्टवेयर के कार्य (Functions Of Utility Software In Hindi)

  • यूटिलिटी सॉफ्टवेयर कंप्यूटर में मौजूद सभी फाइलों को मैनेज करता है।
  • यूटिलिटी सॉफ्टवेयर कंप्यूटर में छिपे वायरस को डिटेक्ट कर डिलीट कर देता है।
  • यूटिलिटी सॉफ्टवेयर कंप्यूटर मेमोरी को मेन्टेन करके रखता है।
  • यूटिलिटी सॉफ्टवेयर सिस्टम में मौजूद खराब फाइल्स को डिलीट करने का काम करता है।
  • यूटिलिटी सॉफ्टवेयर डाटा का बैकअप लेने में मदद करते है।
  • यूटिलिटी सॉफ्टवेयर कंप्यूटर सिस्टम के प्रदर्शन को बढ़ाता है।

यूटिलिटी सॉफ्टवेयर के लाभ (Advantages Of Utility Software In Hindi)

  • यूटिलिटी सॉफ्टवेयर की परफॉर्मेंस बहुत अच्छी है।
  • यूटिलिटी सॉफ्टवेयर कंप्यूटर और उसके इंटरफेस को कस्टमाइज करने में मदद करता है।
  • यूटिलिटी सॉफ्टवेयर कंप्यूटर को सुरक्षित रखता है।
  • यूटिलिटी सॉफ्टवेयर से कंप्यूटर में गलती से कोई फाइल डिलीट हो गई है तो उसे रिकवर करने में मदद मिलती है।
  • कई बार हार्ड डिस्क अनचाही फाइलों से भर जाती है, यह सॉफ्टवेयर उन फाइलों को खोजने और हटाने में मदद करता है।
  • यूटिलिटी सॉफ्टवेयर हार्ड डिस्क को कंप्रेस करके उसकी क्षमता को बढ़ाता है।
  • यूटिलिटी सॉफ्टवेयर नेटवर्क की सेटिंग को कॉन्फ़िगरेशन करने में मदद करता है।

यूटिलिटी सॉफ्टवेयर के नुकसान (Disadvantages Of Utility Software In Hindi)

  • कुछ मामलों में यूटिलिटी सॉफ्टवेयर भी कंप्यूटर के प्रदर्शन को धीमा कर देता है।
  • यूटिलिटी सॉफ्टवेयर ज्यादा RAM का इस्तेमाल करता है।
  • ज्यादा यूटिलिटी सॉफ्टवेयर कंप्यूटर को गर्म कर देते है।
  • यूटिलिटी सॉफ्टवेयर सॉफ्टवेयर पर हैकर्स लगातार अटैक करते रहते हैं, जिससे डेटा चोरी होने का खतरा बढ़ जाता है।

FAQs

सॉफ्टवेयर के कितने हिस्से होते हैं?
कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के तीन भाग होते हैं – सिस्टम सॉफ्टवेयर, एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर, यूटिलिटी सॉफ्टवेयर।

सॉफ्टवेयर के प्रकार कितने होते हैं?
सॉफ्टवेयर तीन प्रकार के होते है – सिस्टम सॉफ्टवेयर, एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर, और यूटिलिटी सॉफ्टवेयर।

दो मुख्य प्रकार के सॉफ्टवेयर कौन से हैं?
दो मुख्य प्रकार के सॉफ्टवेयर सिस्टम सॉफ्टवेयर और एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर है।

सिस्टम सॉफ्टवेयर का दूसरा नाम क्या है?
सिस्टम सॉफ्टवेयर को मास्टर सिस्टम और ऑपरेटिंग सिस्टम भी कहा जाता है।

सॉफ्टवेयर के 3 प्रकार क्या हैं?
सॉफ्टवेयर के 3 प्रकार है – सिस्टम सॉफ्टवेयर, एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर, और यूटिलिटी सॉफ्टवेयर।

यह भी पढ़ें – 

निष्कर्ष

इस लेख को पढ़ने के बाद सॉफ्टवेयर के प्रकार (Software Ke Prakar) या सॉफ्टवेयर कितने प्रकार के होते है के बारे में पता चला गया होगा।

इस लेख में हमने सॉफ्टवेयर के प्रकार (Software Ke Prakar) के बारे में पूरी जानकारी देने की कोशिश की है। उम्मीद है आपको यह लेख पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख सॉफ्टवेयर के प्रकार (Software Ke Prakar) अच्छा लगा हो तो इसे अपने दोस्तों और सोशल मीडिया पर जरूर शेयर करे। और इसी तरह के लेख पढ़ने के लिए हमारे ब्लॉग पर आते रहियेगा।

लेख के अंत तक बने रहने के लिए आपका धन्यवाद

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