सर्च इंजन क्या है? इसका इतिहास और कैसे करता है काम – (What Is Search Engine In Hindi)

Search Engine Kya Hai In Hindi – सर्च इंजन क्या है और यह कैसे काम करता है। इसकी जानकारी इस आर्टिकल में आपको जानकारी देने जा रहे है। जब भी मन में कोई सवाल आता है तो कोई भी इंसान आसपास के लोगों से न पूछकर सीधे अपना मोबाइल फ़ोन निकालता है और जो भी सवाल उसके मन में आता है उसे लिख देता है। और उसे कुछ ही सेकंड में इसका जवाब भी मिल जाता है।

इंटरनेट पर लाखों वेबसाइटें उपलब्ध हैं। जिन पर उपलब्ध जानकारी प्राप्त करने के लिए उपयोगकर्ता उन्हें खोजता है, सर्च इंजन इन विभिन्न सूचनाओं को आसानी से उपलब्ध कराता है। आज के इस लेख में हम जानने वाले है की सर्च इंजन क्या है, कैसे काम करता है, इसके प्रकार, इतिहास और भारतीय सर्च इंजन के नाम। तो चलिए आज का यह लेख शुरू करते है –

सर्च इंजन क्या है? (What Is Search Engine In Hindi)

सर्च इंजन एक सेवा है जिसे हम इंटरनेट के माध्यम से एक्सेस कर सकते हैं। सर्च इंजन एक वेब-आधारित टूल या सॉफ्टवेयर है जो इंटरनेट यूजर्स को वर्ड वाइड वेब पर कोई भी जानकारी खोजने में मदद करता है।

सर्च इंजन एक प्रोग्राम है। या सर्च इंजन इंजन एक ऐसा प्रोग्राम है जो इंटरनेट के डेटाबेस से उपयोगकर्ता के प्रश्न की खोज करता है और उससे सम्बंधित मिली जानकारी को सर्च रिजल्ट पेज में दिखाता है। हर सवाल वर्ल्ड वाइड वेब में सर्च किया जाता है। इंटरनेट में जो भी सर्च किया जाता है। उसे सर्च इंजन सर्च करके सटीक रिजल्ट दिखाने का काम करता है। कुछ सर्च इंजनों के नाम “गूगल, याहू, बिंग” इत्यादि हैं।

वर्तमान सर्च इंजन इंटरनेट पर उपलब्ध सभी वेबसाइटों को स्कैन और एनालाइज करते हैं और उस वेबसाइट पर उपलब्ध उपयोगी डेटा को अपने सर्वर पर सहेजते हैं। सर्च इंजन द्वारा ऐसा करने की प्रक्रिया को वेबसाइट क्रॉलिंग कहा जाता है।

जैसे ही कोई यूजर सर्च इंजन पर कुछ भी सर्च करता है तो सर्च इंजन वेबसाइट को स्कैन करके अपने डेटाबेस में पहले से रखी गई इनफॉर्मेशन को फिल्टर करके यूजर की सर्च की गई जानकारी से मेल खाने वाली जानकारी को प्रदर्शित करता है और यह सब कुछ ही सेकंड के भीतर होता है। सर्च इंजन पर सर्च करने के लिए यूजर द्वारा लिखे गए शब्दों को कीवर्ड कहा जाता है।

उदाहरण के लिए – अगर आपके मन में कोई सवाल आता है तो आप तुरंत गूगल में सर्च करना शुरू कर देते हैं जो कि एक सर्च इंजन है। आपका प्रश्न है “सर्च इंजन क्या है और यह कैसे काम करता है”। यह एक कीवर्ड है।

सर्च इंजन इस सवाल को इंटरनेट की सभी वेबसाइटों में सर्च करता है। जहां भी इस प्रश्न का मिलान होगा, उन वेबसाइटों के नाम सर्च रिजल्ट के पहले पेज में दिखाई देगा। उसके बाद किसी एक लिंक पर क्लिक करके आप “सर्च इंजन क्या है और यह कैसे काम करता है” का जवाब पढ़ सकते हैं। जो प्रश्न होता है उसे इंटरनेट की लैंग्वेज में कीवर्ड कहा जाता है।

कैसे काम करता है सर्च इंजन (How Search Engine Works In Hindi)

आपको पहले ही बता चुके है की ब्राउज़र के सर्च इंजन सर्च में जो भी प्रश्न, टेक्स्ट, शब्द लिखा जाता है, वे कीवर्ड कहलाते हैं। यदि आप गूगल में “सर्च इंजन कैसे काम करता है” लिखते हैं, तो यह कीवर्ड है। यह कीवर्ड वर्ल्ड वाइड वेब में सर्च किया जाता है। जब यह कीवर्ड किसी वेबसाइट के टॉपिक, लेख या टैग के साथ मेल खाता है तो यह सर्च रिजल्ट में दिखाई देता है।

सर्च इंजन तीन चरणों में काम करता है –

  • क्रॉलिंग (Crawling)
  • इंडेक्सिंग (Indexing)
  • रैंकिंग और रिट्रीवल (Ranking And Retrieval)

आइए इन तीनों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

क्रॉलिंग | Crawling

क्रॉलिंग का मतलब है खोजना। मतलब की किसी वेबसाइट का सारा डेटा हासिल करना या किसी वेबसाइट की पूरी जानकारी हासिल करना।

सर्च इंजन वेबसाइट को कैसे क्रॉल करता है – एक सेल्फ प्रोपेल्ड बॉट है जो हर नए और पुराने पेज को सर्च करता है जिसे डिस्कवरी कहा जाता है। बॉट्स को स्पाइडर भी कहा जाता है, जो हर रोज कोर पेज पर जाते हैं। लेकिन हमारी तरह नहीं ये बहुत तेजी से रीड करते हैं।

गूगल के मुताबिक यह लगभग 1 सेकेंड में 100 से 1000 पेज को विजिट कर लेता है। जब बॉट्स को एक नया पेज मिलता है, तो वे इसे बैक-एंड प्रोसेसिंग (पेज टाइटल, मेटा टैग, कीवर्ड, बैकलिंक, इमेज, वीडियो) के लिए भेजते हैं। और फिर जांचता है इस पेज के साथ कौन – कौन से पेज और जुड़े हैं।

जब भी कोई नया पेज मिलता है तो वही प्रक्रिया दोहराई जाती है। क्रॉलिंग + बैकएंड प्रोसेसिंग + इंडेक्सिंग। इसके बाद पेज इंडेक्सिंग होती है। इसके बिना गूगल कभी भी सही सर्च रिजल्ट नहीं दिखा सकता।

इंडेक्सिंग | Indexing

इंडेक्सिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जहां क्रॉल के दौरान जो भी डेटा मिलता है, उन सभी डेटा को डेटाबेस में रखना होता है।

क्रॉल की गई जानकारी को सही क्रम में व्यवस्थित किया जाता है और सर्च इंजन के डेटाबेस में संग्रहीत किया जाता है ताकि खोजे जाने पर इन सूचनाओं को जल्दी से संसाधित किया जा सके और उपयोगकर्ता को दिखाया जा सके।

आप इसकी तुलना किसी पुस्तक के इंडेक्स पेज से कर सकते हैं। जैसे अगर हम किसी किताब के अंदर किसी खास टॉपिक को खोजना चाहते हैं तो सबसे पहले हम इंडेक्स में जाते हैं और पता लगाते हैं कि वह किस पेज पर है।

गूगल भी इसी तरह का एक इंडेक्स तैयार करता है जिसमें सभी वेब पेजों की जानकारी जैसे पेज टाइटल, डिस्क्रिप्टिंग, कीवर्ड्स, इंटरनल लिंक्स, एक्सटर्नल लिंक्स आदि को टेबल फॉर्मेट में स्टोर किया जाता है।

गूगल सर्च सिम्मित के अनुसार, गूगल स्पाइडर हर दिन 3 ट्रिलियन पेजेज क्रॉल करता है। इसका मतलब है कि गूगल के पास दुनिया की सारी जानकारी का एक पुस्तकालय है। गूगल सर्च इंजन डेटा का एक बहुत बड़ा सर्वर है।

रैंकिंग और रिट्रीवल (Ranking And Retrieval)

यह सर्च इंजन का अंतिम चरण है, लेकिन यह अंतिम चरण कहीं अधिक जटिल है। क्योंकि जब आप गूगल में कुछ सर्च करते हैं तो सबसे पहले सर्च का काम यह होता है कि आपको ठीक वैसी ही जानकारी मिले, जिसकी जानकारी आप सर्च कर रहे हैं। लोग सर्च इंजन पर तभी भरोसा करते हैं जब वे उपयोगकर्ता को प्रासंगिक सामग्री ढूंढते और दिखाते हैं। इसके लिए गूगल कुछ एल्गोरिथम का उपयोग करता है।

पेज रैंकिंग के लिए गूगल के 200 कारक हैं। जिससे यह पता चलता है कि सर्च रिजल्ट गूगल होम पेज के किस पोजीशन पर दिखना चाहिए। रैंक एल्गोरिथम को समझना बहुत मुश्किल है। क्योंकि 1 अरब वेब पेजों में से कौन सा गूगल सर्च करके पहले पेज में दिखाता है।

पहले रैंकिंग का अनुमान पोस्ट में कितनी बार कीवर्ड का उपयोग किया गया है और कितने बैकलिंक्स हैं, इन सबसे बड़ी आसानी से साइट को रैंक किया जाता था। अब कुछ वर्षों से गूगल रैंकिंग फैक्टर्स को ढूंढना बहुत मुश्किल हो गया है। गूगल हर साल अपने एल्गोरिथम में बदलाव कर रहा है। क्योंकि गूगल उन साइटों को पहले आने का मौका देता है जो वास्तव में कड़ी मेहनत कर रही हैं।

सरल शब्दों में – इस स्टेप में यह तय किया जाता है कि कौन से क्वेरी या कीवर्ड को सर्च करने पर सर्च इंजन रिजल्ट पेज में कौन – कौन से पेज दिखाई देंगे और किस क्रम में।

वेब पेजों को उनकी गुणवत्ता और विश्वसनीयता के आधार पर रैंक किया जाता है, इसे रैंकिंग कहा जाता है। यह सारा काम सर्च इंजन के रैंकिंग एल्गोरिथम द्वारा किया जाता है, जो एक बहुत ही जटिल गणितीय सूत्र से बना होता है, जिसे समझना बहुत मुश्किल होता है।

सर्च इंजन का इतिहास क्या है? (What Is History Of Search Engine In Hindi)

सभी सर्च इंजनों का काम इंटरनेट पर डेटा सर्च और प्रदर्शित करना था। शुरुआती दिनों में, सर्च इंजन कुछ और नहीं बल्कि फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल का एक संग्रह था। डेटा उन सभी सर्वरों से ढूंढना था जो एक दूसरे से जुड़े थे। तब वर्ल्ड वाइड वेब इंटरनेट से जुड़ने का एकमात्र तरीका था। सर्च इंजन इसलिए बनाया गया क्योंकि वेब सर्वर और फाइल का पता लगाना इतना आसान नहीं था।

पहला सर्च इंजन एक स्कूल प्रोजेक्ट था, जिसके क्रिएटर का नाम एलन एमटेज है। 1990 में, वह एमसीगिल विश्वविद्यालय के छात्र थे। तो आइए अब जानते हैं कि अलग-अलग सर्च इंजन इंजन कब और कैसे बने –

एक्साइट (Excite)

एक्साइट का जन्म फरवरी 1993 में हुआ था। एक्साइट भी एक यूनिवर्सिटी प्रोजेक्ट था और उस प्रोजेक्ट का नाम आर्किटेक्स्ट था। इस प्रोजेक्ट में 6 स्नातक छात्र थे। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी का यह प्रोजेक्ट 1995 तक चला और क्रॉलिंग सर्च इंजन का रूप ले लिया। इसमें भारी वृद्धि के कारण इसने वेब-क्रॉलर और मैगलन को भी खरीद लिया। अंततः इसने एमएसएन और नेटस्केप के साथ भागीदारी की।

याहू (Yahoo)

इसका जन्म 1994 में हुआ था। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से इसकी शुरुआत हुई थी। जैरी यांग और डेविड फिलो ने इसकी शुरुआत की थी। ये दोनों इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के स्नातक छात्र थे। जब उन्होंने “जेरी एंड डेविड टू गाइड टू वर्ल्ड वाइड वेब” नामक वेबसाइट बनाई। 1994 में याही गाइड ने याहू का रूप ले लिया। याहू.कॉम डोमेन 18 जनवरी 1995 को पंजीकृत किया गया था।

वेब क्रॉलर (WebCrawler)

यह एक मेटा सर्च इंजन है जिसका जन्म 20 अप्रैल 1994 को हुआ था। यह गूगल और याहू दोनों के टॉप रिजल्ट्स को दिखाता था। जिसमें आप आसानी से ऑडियो, वीडियो, न्यूज सर्च कर सकते हैं। इसके निर्माता का नाम ब्रायन पिंकर्टन है।

लाइकोस (Lycos)

इसका जन्म भी 1994 में ही हुआ था। यह खोज के साथ-साथ एक वेब पोर्टल सेवा भी प्रदान करता है। इसकी शुरुआत कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी से हुई थी। इसने ईमेल, वेब होस्टिंग, सोशल नेटवर्किंग और मनोरंजन वेबसाइटों की सेवा भी प्रदान की थी।

इन्फोसीक (Infoseek)

इन्फोसीक भी एक बहुत ही लोकप्रिय सर्च इंजन है जिसका जन्म 1994 में ही हुआ था, जिसके संस्थापक स्टीव किर्श थे। इन्फोसीक का संचालन इन्फोसीक कोपेर्तिओं द्वारा किया जाता है। इसका हेड क्वार्टर सनीवेल, कैलिफोर्निया है। इस कंपनी को द वॉल्ट डिज़नी कंपनी ने 1998 में खरीदा था।फिर बाद में यह याहू के साथ जुड़ गई और इसका अभी तक कोई नाम नहीं है।

अल्ताविस्ता (AltaVista)

इसका जन्म 1995 में हुआ था। पुराने ज़माने में यह सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला सर्च इंजन था । 2003 में इसे याहू ने खरीद लिया था। लेकिन ब्रांड और सेवाएं अल्ताविस्टा की थीं। लेकिन जुलाई 2013 में याहू द्वारा सभी सेवाओं को रोक दिया गया और इसे याहू सर्च इंजन पर रीडायरेक्ट कर दिया गया।

इंकटोमी (Inktomi)

इंकटोमी का जन्म 1996 में हुआ था। इसके संस्थापक एरिक ब्रेवर और पॉल गौथियर नाम का एक स्नातक छात्र था। शुरुआत में यह एक सर्च इंजन भी था जिसे यूनिवर्सिटी में विकसित किया गया था।

आस्क (ASK.COM)

इसका नाम आज भी है। ASK.COM पहले आस्क जीव्स था। इसका जन्म भी 1996 में हुआ था। यह एक प्रश्न उत्तर साइट है। जिसका फोकस ई-बिजनेस और वेब सर्च इंजन पर ज्यादा था। इसके संस्थापक का नाम गैरेट ग्रुएनर और डेविड वार्थेन हैं।

गूगल (Google)

आज के समय में गूगल खरबो की कंपनी है, जिसने ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में अपनी जगह बनाई है, जो एक क्रिया है। लेकिन इसे बनाने में दो पीएचडी छात्रों का हाथ था। जिनका नाम सर्गेई ब्रिन और लैरी पेज है। जो स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी, कैलिफोर्निया के छात्र थे। वे 1995 में वहां मिले और वहीं से इस सर्च इंजन की शुरुआत हुई। शुरुआत में, उन्होंने इसे (गूगल को) BACKRUB नाम दिया। और 1997 में दोनों द्वारा सर्च इंजन का नाम “गूगल” रख दिया गया।

सर्च इंजन के प्रकार (Types of Search Engines In Hindi)

सर्च इंजन को मुख्य रूप से तीन कैटेगरी में बांटा जा सकता है जो इस प्रकार हैं-

  • Crawler-Based Search Engine
  • Directories-Based Search Engine
  • Hybrid Search Engine
  • Meta Search Engine

क्रॉलर बेस्ड सर्च इंजन

क्रॉलर सर्च इंजन के डेटाबेस की नई सामग्री को क्रॉल और अनुक्रमित करने के लिए स्पाइडर, क्रॉलर, रोबोट और बॉट प्रोग्राम का उपयोग करते हैं। किसी भी वेबसाइट को सर्च रिजल्ट में बदलने के लिए क्रॉलिंग, इंडेक्सिंग, कैलकुलेटिंग प्रासंगिकता और रिट्रीवलिंग रिजल्ट इन सभी नियमों का पालन करना होता है। क्रॉलर सर्च इंजन के प्रमुख उदाहरण गूगल, बिंग, याहू हैं।

डायरेक्ट्रीज बेस्ड सर्च इंजन

वेब डायरेक्टरी को सब्जेक्ट डायरेक्टरी के रूप में जाना जाता है। डायरेक्टरी सर्च इंजन को श्रेणी के अनुसार वेबसाइटों की एक सूची दी जाती है और वेबसाइट किस बारे में है इसका एक संक्षिप्त विवरण दिया जाता है। इस प्रकार का सर्च इंजन पूरी तरह से मानव संचालित है, जिसमें वेबसाइट का मालिक अपनी वेबसाइट को इन डायरेक्ट्रीज में सबमिट कर सकता है। याहू आदि डायरेक्टरी सर्च इंजन के उदाहरण हैं।

हाइब्रिड सर्च इंजन

हाइब्रिड सर्च इंजन क्रॉलर और डायरेक्टरी सर्च इंजन का मिश्रण है। इस श्रेणी में आने वाले सर्च इंजन क्रॉलर सर्च इंजन और डायरेक्टरी सर्च इंजन दोनों से वेब पेज लेकर अपना परिणाम दिखाते हैं, लेकिन वर्तमान में हाइब्रिड सर्च इंजन पूरी तरह से क्रॉलर पर आधारित है। याहू, गूगल हाइब्रिड सर्च इंजन के उदाहरण हैं।

मेटा सर्च इंजन

ऐसे सर्च इंजन जो किसी अन्य सर्च इंजन से डेटा प्राप्त करके परिणाम दिखाते हैं, मेटा सर्च इंजन कहलाते हैं। जब उपयोगकर्ता कोई क्वेरी दर्ज करता है, तो वह उस क्वेरी को कई अलग-अलग सर्च इंजनों पर जाकर खोजता है और परिणाम लाकर उस पर अपना स्वयं का एल्गोरिदम लागू करता है और उसे फ़िल्टर कर उपयोगकर्ता को दिखाता है। मेटा सर्च इंजन के उदाहरण – मेटाक्रॉलर

सर्च इंजन के नाम

अगर देखा जाए तो दुनिया में कई सर्च इंजन हैं, लेकिन यहां हम आपको सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले पॉपुलर सर्च इंजन की लिस्ट पेश कर रहे हैं।

  • Google
  • Bing
  • Yahoo
  • Baidu
  • DuckDuckGo
  • Internet Archive
  • Yandex

भारतीय सर्च इंजन के नाम (Indian Search Engine Names In Hindi)

यहां हमने आपके लिए कुछ भारतीय सर्च इंजनों की सूची बनाई है। ये सभी इतने लोकप्रिय नहीं हैं, लेकिन कुछ हद तक ये अच्छा काम करते हैं।

  • 123 Search
  • Epic Search
  • Guruji

खोज इंजन के उदाहरण (Examples Of Search Engines In Hindi)

वर्तमान में हम कई सर्च इंजन का उपयोग करते हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख सर्च इंजन इस प्रकार हैं –

गूगल

गूगल की शुरुआत साल 1997 में अमेरिकी कंप्यूटर वैज्ञानिक लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन ने की थी। गूगल दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला सर्च इंजन है। गूगल के पास सर्च इंजन मार्किट शेयर की हिस्सेदारी का लगभग 92.81% हिस्सा है। गूगल के इतने लोकप्रिय होने का एकमात्र कारण इसका सूचना डेटाबेस है क्योंकि इसमें कुछ भी खोजने पर तुरंत उत्तर मिल जाता है।

बिंग

बिंग की शुरुआत माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ स्टीव बाल्मर ने साल 2009 में की थी। बिंग सर्च इंजन की लिस्ट में गूगल के बाद दूसरे नंबर पर है। बिंग सर्च इंजन मार्केट शेयर के लगभग 2.38% के साथ दूसरे स्थान पर है। यह एक बहुत ही लोकप्रिय सर्च इंजन है, इसे माइक्रोसॉफ्ट ने अपने पुराने सर्च इंजन लाइव सर्च और एमएसएन सर्च इंजन से बदल दिया था।

याहू

एक सर्च इंजन और पोर्टल होने के अलावा अन्य सुविधाएं भी प्रदान करने में सक्षम है। जिसमें याहू मेल सबसे लोकप्रिय है। याहू की स्थापना 1994 में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के दो छात्रों, जेरी यंग और डेविड फिलो द्वारा की गई थी। 1995 में इसका नाम बदलकर याहू कर दिया गया।

एओएल

एओएल एक अमेरिकी वेब पोर्टल और ऑनलाइन सेवा प्रदाता कंपनी है। भारत में AOL सर्च इंजन का इस्तेमाल कम होता है लेकिन इसमें कई हिंदी वेबसाइट उपलब्ध हैं और यह हिंदी सर्च के हिसाब से एक अच्छा सर्च इंजन है। सर्च इंजन मार्केट में इसकी हिस्सेदारी लगभग 0.06% मानी जाती है।

येन्डेक्स

येन्डेक्स को 1997 में Arkady Valozh और Arkady Borvsky द्वारा शुरू किया गया था। यह रूस का सबसे लोकप्रिय सर्च इंजन है। येन्डेक्स को रूस में सबसे लोकप्रिय सर्च इंजन के रूप में स्थान दिया गया है। येन्डेक्स में किसी भी जानकारी को खोजना उतना ही आसान है जितना कि गूगल में। इसमें सर्च इंजन के अलावा अन्य फीचर भी मिलते हैं। भारत में इसकी बाजार हिस्सेदारी केवल 0.01% है।

डकडकगो

डकडकगो एक सर्च इंजन है जो उपयोगकर्ताओं को विभिन्न जानकारी देने का काम करता है और उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता की रक्षा करता है। डकडकगो को साल 2008 में गेब्रियल वेनबर्ग ने लॉन्च किया था। डकडकगो ने अपना खुद का ऐप भी लॉन्च किया है जो कि डकडकगो प्राइवेसी ब्राउजर के रूप में प्लेस्टोर में उपलब्ध है। डकडकगो गूगल और बिंग से छोटा सर्च इंजन है।

सर्च इंजन की रैंकिंग एल्गोरिथम कैसे काम करती है?

इसे समझना बहुत मुश्किल काम है। क्योंकि कोई भी सर्च इंजन अपने एल्गोरिथम के बारे में पूरी जानकारी नहीं देता है और बहुत सी चीजों को गोपनीय रखा जाता है।

गूगल अपने SERP में किसी वेबसाइट की रैंकिंग निर्धारित करने के लिए 200 से अधिक नियमों का पालन करता है। लेकिन ये नियम क्या हैं ये किसी को पक्का पता नहीं है। इसे हमेशा गुप्त रखा जाता है।

किसी भी रैंकिंग एल्गोरिदम का मुख्य काम पृष्ठों को उनकी गुणवत्ता सामग्री के अनुसार रैंक करना है। ताकि यूजर्स को सही और सटीक जानकारी दी जा सके। सही ढंग से रैंक करने के लिए गूगल को समय-समय पर अपना एल्गोरिदम अपडेट करना पड़ता है। गूगल हर साल अपने एल्गोरिथम को 500 से 600 बार बदलता है।

यही कारण है कि अगर कुछ साल पहले की बात करें तो किसी के लिए भी अपनी वेबसाइट को रैंक करना एक आसान काम था। लेकिन अब यह बहुत ही जटिल काम हो गया है। अब कुछ भी सर्च करने पर टॉप 10 में वही वेबसाइट्स आती हैं, जिनका कंटेंट क्वालिटी है और जो यूजर्स को सही जानकारी दे रही है।

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निष्कर्ष

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