डार्क वेब क्या है? क्यों कहा जाता है इसे काले धंधों का अड्डा – (What Is Dark Web In Hindi)

What Is Dark Web In Hindi – इंटरनेट ने व्यवसाय, शिक्षा, संचार आदि विभिन्न क्षेत्रों में क्रांति ला दी है। इसी कारण आज के युग को डिजिटल युग कहा जा रहा है।

इंटरनेट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इंटरनेट की मदद से वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन स्टडी जैसे काम आसानी से हो रहे हैं। लेकिन इससे ऑनलाइन फ्रॉड के मामले भी बढ़ गए हैं। लेकिन आपको बता दें कि आप और हम जितना इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं, वह इस वर्चुअल दुनिया का सिर्फ 5 से 10 फीसदी ही है।

एक तरफ इंटरनेट के आने के बाद जहां दुनिया को आगे बढ़ने का एक नया मौका मिला है। वहीं अब इसका एक डरावना पहलू भी सामने आया है, जिसका नाम डार्क वेब है। इंटरनेट की एक बड़ी दुनिया है। जिसके एक बड़े हिस्से में हम नहीं पहुंच पाते हैं और उस दुनिया को डार्क वेब कहा जाता है। डार्क वेब एक ऐसी जगह है जहां ड्रग्स, हथियार, अंडरवर्ल्ड, हैकिंग और अवैध गतिविधियां होती हैं। आप में से कई लोगों ने डार्क वेब का नाम तो सुना ही होगा। आज हम इसके बारे में जानेंगे और यह भी जानेंगे कि डार्क वेब की शुरुआत कैसे हुई?

गूगल, याहू या कोई भी अन्य खोज इंजन संपूर्ण वेब दुनिया का केवल 4% तक ही कवर करता है। और दूसरी ओर, हम वास्तव में बाकी 96% वेब के बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं और यह एक आम व्यक्ति की पहुंच से बाहर है।

इस बड़े हिस्से को डार्क वेब कहा जाता है। इस डार्क वेब में ऑनलाइन ड्रग्स की बिक्री, पोर्नोग्राफी, हैकिंग और हर तरह की गैर कानूनी चीजें शामिल हैं जो नियमों के खिलाफ हैं। साथ ही ऐसी डार्क वेबसाइट्स और डार्क वेब पर जाना भी ग़ैरक़ानूनी है। इसमें अन्य देशों के साथ हमारा देश भी शामिल है।

वहीं कुछ असामाजिक गतिविधियों को छोड़कर यह डार्क वेब काफी उपयोगी है। यदि आप डार्क वेब क्या है और यह कैसे काम करता है इसके बारे में अधिक जानना चाहते हैं तो आपको इस लेख के अंत तक बने रहना होगा। तो चलिए शुरू करते हैं।

डार्क वेब क्या है? (What Is Dark Web In Hindi)

नाम सुनते ही सबसे पहले दिमाग में यही ख्याल आता है कि ये क्या है? यह वेब का एक अनछुआ हिस्सा है जिसे हर कोई एक्सेस नहीं कर सकता है। इसके जरिए आम लोगों को ठगा जाता है और कई तरह के काले धंधे किए जाते हैं।

डार्क वेब इंटरनेट का वह हिस्सा है जिसे सर्च इंजन द्वारा इंडेक्स नहीं किया जाता है। डार्क वेब को डार्क नेट भी कहा जाता है। इस तरह डार्क वेब डीप वेब का एक हिस्सा होता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, केवल 4% इंटरनेट आम जनता को दिखाई देता है और इसे सरफेस वेब कहा जाता है।

जानकारों के मुताबिक हम इंटरनेट का जितना हिस्सा इस्तेमाल करते हैं। वह सिर्फ 4 प्रतिशत है। इसे सरफेस वेब के नाम से जाना जाता है। वहीं, इंटरनेट का बाकी बचा हुआ 96 फीसदी भाग डीप वेब और डार्क वेब है। आप डार्क वेब को सामान्य रूप से एक्सेस नहीं कर सकते।

इसके लिए आपको अपना आईपी एड्रेस बदलकर एक खास ब्राउजर का इस्तेमाल करना होगा। इसके अलावा डार्क वेब पर सर्फिंग करने के लिए वीपीएन और कई एनोनिमिटी टूल्स का इस्तेमाल करना पड़ता है। डार्क वेब पर ऐसी गतिविधियां होती हैं जिनकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते। यहां मानव तस्करी, नशीली दवाओं की तस्करी, सरकारों के डिफेंस सीक्रेट्स की हैकिंग, बाल तस्करी, हथियारों की खरीदारी और कई ऐसे खतरनाक काम किए जाते हैं, जिनकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।

डार्क वेब मार्केट में सायनाइड जैसे जहर बिकते हैं। डार्क वेब पर कितनी वेबसाइट हैं और इन वेबसाइटों पर कौन क्या करता है? इनका पता लगाना काफी मुश्किल होता है। डार्क वेब पर डीलर किसे क्या और कैसे बेचते हैं? इसके बारे में जानना भी एक मुश्किल काम है। यहां पेमेंट के लिए क्रिप्टो करेंसी का इस्तेमाल किया जाता है, जो ब्लॉक चेन सिक्योरिटी पर काम करता है। इस वजह से भुगतान कौन कर रहा है और किसको? इस बारे में पता ही नहीं चल पाता। डार्क वेब पर वेबसाइटों के डोमेन नाम बहुत सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड होते हैं। उनके एक्सटेंशन के पीछे कोई .Com, .Net या .In नहीं बल्कि .Onion होता है। डार्क वेब के वेबसाइटों की IP एड्रेस प्राइवेट रहते हैं, जिससे इनके सर्वर को खोज पाना नामुमकिन है।

डार्क वेब में हर यूजर और वेबसाइट के मालिक की पहचान गुप्त रखी जाती है। क्योंकि यहां किसी वेबसाइट को एक्सेस करने के लिए कई वीपीएन का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे किसी को पता नहीं चलता कि वेबसाइट को कहां से एक्सेस किया जा रहा है।

डार्क वेब में ऐसी वेबसाइटें हैं जो जनता को दिखाई नहीं देती हैं, क्योंकि उनके आईपी पते का विवरण जानबूझकर छिपाया गया होता है। साथ ही, ऐसी वेबसाइटों को सही टूल का उपयोग करते हुए देखा जा सकता है, लेकिन उनके सर्वर विवरण का पता लगाना असंभव है। साथ ही उन्हें पूरी तरह से ट्रैक करना भी उतना ही मुश्किल है। डार्क वेब तक पहुंचने के लिए आप कई Anonymity टूल्स का उपयोग कर सकते हैं।

डार्कवेब मार्केट क्या हैं? (What Are Dark Web Markets In Hindi)

वे इंडस्ट्री जो इन डार्क वेब में ऑपरेट होते हैं, डार्कनेट मार्केट या डार्कवेब मार्केट कहलाते हैं। इनमें कई अवैध उत्पादों का काला बाजार भी है, जबकि पोर्न, बाल तस्करी, सरकारी सीक्रेट्स आदि। यहां वे सभी कार्य होते हैं जिनका सरकारों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा विरोध किया जाता है।

यहां आप कुछ ऐसा भी खरीद सकते हैं जो किसी के कंप्यूटर सिस्टम को हैक करने में आपकी सहायता कर सकते हैं।

डार्क वेब कैसे काम करता है? (How does Dark Web Work In Hindi)

डार्क वेब ओनियन रूटिंग तकनीक पर आधारित है। जिस तरह एक प्याज में कई परतें होती हैं, उसी तरह डार्क वेब में भी कई वीपीएन होते हैं।

जब भी आप डार्क वेब खोलते हैं। मान लीजिए आप डार्क वेब में कोई वेबसाइट एक्सेस करना चाहते हैं, तो आप रिक्वेस्ट इन वीपीएन (कई नंबर) के माध्यम से सर्वर तक पहुंच जाएंगे। जिससे आपकी पहचान का पता लगाना असंभव हो जाएगा। डार्क वेब में .Onion डोमेन एक्सटेंशन का उपयोग किया जाता है, वे अत्यधिक एन्क्रिप्टेड होते हैं।

कुल मिलाकर, डार्क वेब इंटरनेट पर गुप्त स्थानों का एक समूह है जो उपयोगकर्ता की क्रियाओं, उपयोगकर्ता की पहचान, उपयोगकर्ता क्या कर रहा है, उपयोगकर्ता कहाँ से पहुँच रहा है, आदि को छिपाता है।

हमारी सामान्य वेबसाइटों की तुलना में इस डार्क वेब की कार्यशैली पूरी तरह से अलग है। आप इन सामान्य वेब ब्राउज़र जैसे गूगल क्रोम, मोज़िला फ़ायरफ़ॉक्स, सफारी आदि की मदद से इन डार्क वेबसाइटों तक नहीं पहुँच सकते। उन पर जाने के लिए, आपको एक विशेष वेब ब्राउज़र का उपयोग करना होगा, जिसे टोर कहा जाता है। इस ब्राउज़र से ही आप अपने सिस्टम में डार्क वेब वेबसाइट खोल सकते हैं। वहीं, डार्क वेबसाइट्स के एक्सटेंशन भी काफी अलग होते हैं। उदाहरण के लिए, .Onion जो एक अत्यधिक एन्क्रिप्टेड डोमेन नाम है। इन डार्क वेबसाइटों के लिए उपयोग किया जाता है।

अब शायद आप इसके बारे में अधिक जानने के लिए काफी एक्साइटेड होंगे। और हो भी क्यों न यह इतना रोमांचक जो हो –

वैसे, इसमें प्रवेश करना इतना आसान नहीं है, कि आप बस लॉग इन करें और इस डार्क वेब में घुस गए। वहीं इसमें जाने होने के लिए आपको कुछ बातों का पालन करना होगा। आइए जानते हैं उनके बारे में।

1. सबसे पहले, आपको एक सुरक्षित वीपीएन सेवा की आवश्यकता होगी जो आपकी पहचान को दूसरों से सुरक्षित रखे। क्योंकि वेब का यह पक्ष इतना सुरक्षित नहीं है और कई हैकर्स हमेशा डार्क वेब के इन हिस्सों में घूमते रहते हैं। इसलिए, अपने आप को और अपने डेटा को सुरक्षित रखने के लिए, एक सुरक्षित वीपीएन सेवा का उपयोग किया जाना चाहिए।

2. दूसरी ओर, आपको टोर वेब ब्राउज़र डाउनलोड करना होगा ताकि आप डार्क वेब में सुरक्षित और सिक्योर रूप से लॉगिन कर सकें।

याद रहे – टॉर वेब ब्राउजर को हमेशा ऑफिशियल वेबसाइट से ही डाउनलोड करें, क्योंकि इंटरनेट में आपको कई डुप्लीकेट वेब ब्राउजर मिल सकते हैं, जो आगे चलकर आपके लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं।

3. एक बार जब आप टोर वेब ब्राउज़र को सुरक्षित रूप से स्थापित कर लेते हैं, तो आपको सभी ऐप और प्रोग्राम बंद कर देना चाहिए ताकि आप आसानी से डार्क वेब में क्रॉल कर सकें।

अगर आप डार्क वेबसाइट सर्च करना चाहते हैं तो आप GRAM सर्च इंजन का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह काफी हद तक गूगल से मिलता-जुलता है और इसे खासतौर पर डार्क वेब के लिए डिजाइन किया गया है।

डार्क वेब की शुरुआत कैसे हुई? (How Did The Dark Web Start In Hindi)

इसकी शुरुआत अमेरिका ने 90 के दशक में की थी। अमेरिकी सेना ने दुनिया भर में अपने एजेंटों के साथ खुफिया जानकारी साझा करने के लिए डार्क वेब बनाया है। हालाँकि, डार्क वेब पर कम लोगों के साथ, गुप्त जानकारी लीक हो सकती थी। इसी वजह से Anonymity बनाने के लिए आम जनता के लिए डार्क वेब जारी किया। यहां ज्यादा यूजर्स के आने से किसी को भी सीक्रेट जानकारी का पता नहीं चल सका।

भूलकर भी कभी भी डार्क वेब एक्सेस नहीं करना चाहिए। खुफिया एजेंसियों की नजर हमेशा डार्क वेब पर रहती है। इस पर विजिट करने के बाद आप क्या कर रहे हैं? इसे ट्रैक किया जा सकता है। इस मामले में आपको गिरफ्तार भी किया जा सकता है। डार्क वेब एक्सेस करने से आपके डिवाइस पर मैलवेयर अटैक हो सकता है। इसके अलावा इसमें कई तरह के वायरस भी आ सकते हैं।

डार्क वेब का इतिहास (History Of Dark Web In Hindi)

डार्क वेब वास्तव में अमेरिका द्वारा 1990 के दशक में अपने सैनिकों के लिए विकसित किया गया था। दरअसल, अमेरिका ने अपने सैनिकों के दस्तावेज सुरक्षित भेजने के लिए ओनियन रूटिंग टेक्नोलॉजी बनाई थी। ओनियन रूटिंग तकनीक का इस्तेमाल करते हुए हैकर के लिए डेटा को हैक करना असंभव था। इस तकनीक का उपयोग डार्क वेब में उपयोग साबित हुआ।

डार्क वेब वास्तव में 2002 में शुरू हुआ था जब टोर ब्राउज़र (द ओनियन रूटिंग प्रोजेक्ट) का अल्फा संस्करण लॉन्च किया गया था। टोर एक ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर है जो उपयोगकर्ताओं को गुमनाम रूप से इंटरनेट का उपयोग करने की अनुमति देता है। आधुनिक टोर ब्राउज़र को 2006 में विकसित किया गया था, जिसके माध्यम से कोई भी उपयोगकर्ता आसानी से डार्क वेब तक पहुंच सकता है।

इसके बाद बिटकॉइन नाम की एक क्रिप्टोकरंसी का साल 2009 में निर्माण हुआ, क्योंकि डार्क वेब में लोग गैरकानूनी काम तो करते थे लेकिन पैसे के लेन-देन को सीक्रेट रखना नामुमकिन था। लेकिन बिटकॉइन के आने से डार्क वेब में लेन-देन करना भी आसान हो गया है।

डार्क वेब पर अवैध काम तब बढ़ने लगे जब 2011 में सिल्क रोड नाम के एक ऑनलाइन मार्केटप्लेस को डार्क वेब में लॉन्च किया गया, जिसमें ड्रग्स की अवैध बिक्री होती थी। इस वेबसाइट को बाद में बैन कर दिया गया था, लेकिन बैन होने से पहले इस मार्केटप्लेस ने अरबों डॉलर की कमाई कर ली थी। आज के समय में डार्क वेब में होने वाली अवैध गतिविधियों की कई घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

डार्क वेब एक्सेस करने के लिए पड़ती है खास ब्राउजर की जरूरत

डार्क वेब को एक्सेस करने के लिए साधारण ब्राउज़र का उपयोग नहीं किया जाता है। उन्हें टोर यानि द ओनियन राउटर जैसे खास ब्राउजर की आवश्कयता होती है। टोर पर आईपी एड्रेस हमेशा बदलता रहता है। यही वजह है कि डार्क वेब पर काम करने वाले लोगों को पकड़ना लगभग असंभव है। डार्क वेब पर ब्राउज की जा रही वेबसाइट के अंत में .Com, Net या .In नहीं बल्कि .Onion होता है। डार्क वेब के वेबसाइटों की IP एड्रेस प्राइवेट रहते हैं, जिससे इनके सर्वर को खोज पाना नामुमकिन है। यहां वेबसाइट होस्ट और विजिटर तक का नाम भी पता नहीं लगाया जा सकता। डार्क वेब में हर यूजर और वेबसाइट के मालिक की पहचान गुप्त रखी जाती है। क्योंकि यहां किसी वेबसाइट को एक्सेस करने के लिए कई वीपीएन का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे किसी को पता नहीं चलता कि वेबसाइट को कहां से एक्सेस किया जा रहा है।यही कारण है कि सरकारें भी डार्क वेब पर काम करने वाले अपराधियों तक नहीं पहुंच पा रही हैं और न ही उन्हें रोक पा रही हैं।

कौन लोग करते हैं डार्क वेब का इस्तेमाल?

अब आप सोच रहे होंगे कि डार्क वेब का इस्तेमाल कौन करता है। ऐसा माना जाता है कि दुनिया भर में होने वाले अवैध और गलत कामों की प्लानिंग वहीं होती है। इसके अलावा व्हिसलब्लोअर भी इसका इस्तेमाल करते हैं। सरकारी-कॉर्पोरेट घोटालों का पर्दाफाश करने के लिए खोजी पत्रकार डार्क वेब का इस्तेमाल करते हैं।

क्या डार्क वेब गैरकानूनी है?

आपको बता दें, डार्क वेब का इस्तेमाल करना गैरकानूनी नहीं है। यहां कोई भी पहुंच सकता है, लेकिन डार्क वेब का इस्तेमाल अवैध उद्देश्यों के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

हम करते हैं सर्फेस वेब का उपयोग?

वेब के जिस भाग का हम उपयोग करते हैं उसे सरफेस वेब कहते हैं। डार्क वेब सरफेस वेब से बिल्कुल अलग है। डार्क वेब में कंटेंट का कोई नियमन नहीं है। डार्क वेब को एक्सेस करने के लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता होती है।

डार्क वेब को कैसे एक्सेस करें (How To Access Dark Web In Hindi)

आप अपने कंप्यूटर की मदद से डार्क वेब कैसे एक्सेस कर सकते हैं। साथ में इससे जुड़ी तमाम छोटी-बड़ी बातों पर भी गौर किया जाएगा।

अपने लिए सबसे अच्छी वीपीएन सेवा चुनें। आप टोर का इस्तेमाल कर रहे हैं या नहीं। फिर भी, आपको निश्चित रूप से एक वीपीएन सेवा का उपयोग करना चाहिए।

आपको अपनी गुमनामी और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है। वो भी तब जब आप डार्क वेब का इस्तेमाल कर रहे हों।

कभी भी इस गलतफहमी में न आएं कि आपके ISP (इंटरनेट सेवा प्रदाता) और कानून प्रवर्तन आपकी गतिविधियों पर नज़र नहीं रख रहे हैं। वैसे तो जो लोग टोर ब्राउज़र का इस्तेमाल करते है। वे अपने लिए बहुत ही सुरक्षित नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं।

हाल ही में टोर की भेद्यता के बारे में एक खबर आई थी, जहां टोर के उपयोगकर्ताओं का असली आईपी पता हैक कर लिया गया था। ताकि उन्हें आसानी से ट्रेस किया जा सके। इसलिए अगर आप टोर का इस्तेमाल करते हैं तो इसे जल्द ही अपडेट कर लें। और ऐसी भेद्यता होना आम बात है।

केवल एक वीपीएन सॉफ्टवेयर का उपयोग करके, यह आपको और आपके आईपी पते को आईएसपी और सरकारी एजेंसियों से छुपाता है। इसके साथ ही यह आपके सभी इंटरनेट उपयोग को एन्क्रिप्ट भी करता है। इसलिए आपकी वास्तविक पहचान का पता लगाना लगभग असंभव हो जाता है।

दूसरा लाभ यह है कि वीपीएन का उपयोग करके, यह आपको हैकर्स से दूर रखता है जो आपके कंप्यूटर से आपकी पहचान और व्यक्तिगत फाइलों को आसानी से चुरा सकते हैं। तो जल्द ही आपको अपने सिस्टम में एक VPN इनस्टॉल कर लेना चाहिए।

आप इंटरनेट एक्सप्लोरर या गूगल क्रोम जैसे सामान्य ब्राउज़र का उपयोग करके डार्क वेब नहीं खोल सकते। डार्क नेट का एक्सेस पाने के लिए आपको एक डार्क वेब ब्राउजर भी डाउनलोड करना होगा जिसे टोर ब्राउजर बंडल भी कहा जाता है। केवल आधिकारिक टोर वेबसाइट का उपयोग करें, इसे कभी भी किसी अन्य वेबसाइट से डाउनलोड न करें।

टोर आधिकारिक वेबसाइट: https://www.torproject.org/download/download.html आप सभी प्रोग्राम्स को बंद करके टोर ब्राउज़र का उपयोग कर सकते हैं।

अपने पीसी पर टोर ब्राउज़र बंडल इनस्टॉल करें। जब डाउनलोड पूरा हो जाता है, तो आप डाउनलोड की गई फ़ाइल पर डबल-क्लिक कर सकते हैं, साथ ही गंतव्य फ़ोल्डर का चयन कर सकते हैं और फिर एक्सट्रेक्ट का चयन कर सकते हैं।

अब टोर ब्राउज़र शुरू करें।

वह फ़ोल्डर खोलें जहां आपने टोर ब्राउज़र को एक्सट्रेक्ट किया था और “स्टार्ट टोर ब्राउज़र” पर डबल-क्लिक करें।

अब आपकी ब्राउजर विंडो में टोर स्टार्ट पेज खुलेगा। अब आपने डार्क वेब का दरवाजा खोल दिया है।

क्या डार्क वेब ब्राउज़ करना खतरनाक हो सकता है?

सच में डार्क वेब ब्राउज़ करना बहुत खतरनाक हो सकता है। अगर आपने कुछ बातों पर ध्यान नहीं दिया है। तो आइए जानते हैं उन के बारे में जिन्हें आप खुद को दूर रखकर इन समस्याओं से दूर रह सकते हैं।

वायरस

कुछ वेबसाइटें आपके डिवाइस को वायरस से संक्रमित कर सकती हैं, और कई अलग-अलग प्रकार के वायरस डार्क वेब में मौजूद हैं। तो याद रखें कि ऐसी वेबसाइट से कुछ भी डाउनलोड न करें जिस पर आपको भरोसा न हो।

हैकर्स

आपको इन हैकर्स से दूर रहना चाहिए। क्योंकि ये आपके डिवाइस को आसानी से हैक कर सकते हैं। डार्क वेब में कई हैकर फ़ोरम हैं जहाँ आप इन कंप्यूटर हैकर्स को कई अवैध गतिविधियों को करने के लिए रख सकते हैं। फिर याद रखें कि कोई भी आपके सिस्टम को आसानी से हैक कर सकता है।

वेबकैम हाईजैकिंग

डार्क वेब में ऐसी वेबसाइटें भी हैं जो एक रिमोट एडमिनिस्ट्रेशन टूल – जिसे “RAT” के रूप में भी जाना जाता है। इसे आपके डिवाइस पर इंस्टाल करने के लिए उकसाएगा। इसका मतलब यह होगा कि वे आपके वेबकैम को आसानी से हाईजैक कर सकते हैं। फिर वे कैमरा लेंस के माध्यम से आपकी सभी गतिविधियों पर नज़र रख सकते हैं। इसलिए आप डार्क वेब में ब्राउज़ करते समय हमेशा लेंस के चेहरे को कागज़ या कपड़े से ढक सकते हैं। इससे वे अपने मनसूबों में सफल नहीं हो पाएंगे।

डार्क वेब के नुकसान (Disadvantages Of Dark Web In Hindi)

डार्क वेब के कई नुकसान हैं, इसलिए हम भी आपको इसे एक्सेस न करने की सलाह देते हैं। डार्क वेब के कुछ नुकसान निम्नलिखित हैं –

  • डार्क वेब पर आए दिन हैकर बैठे रहते हैं आपकी थोड़ी सी लापरवाही से आपका पूरा डाटा हैक हो सकता है।
  • यहां आपको कई ऐसे लिंक मिलेंगे जिन पर क्लिक करने पर आपके सिस्टम में वायरस घुस जायेंगे ।
  • डार्क वेब में हमेशा फिशिंग और स्कैम का खतरा बना रहता है।
  • हैकर्स आपका सिस्टम हैक कर लेंगे और आपको पता भी नहीं चलेगा, इससे आपकी प्राइवेसी खतरे में पड़ सकती है।
  • कोई भी अवैध गतिविधि करने पर आपको जेल हो सकती है।
  • डार्क वेब में आपको ऐसा कंटेंट मिलेगा जो आपका ध्यान भटका सकता है।

डार्क वेब के फायदे (Benefits Of Dark Web In Hindi)

डार्क वेब के भी कुछ फायदे हैं, इसलिए इसे पूरी तरह से प्रतिबंधित नहीं किया गया है, डार्क वेब के कुछ फायदे इस प्रकार हैं –

  • अगर आप डार्क वेब को सावधानी से एक्सेस करते हैं, तो कोई भी आपकी पहचान को ट्रैक नहीं कर पाएगा।
  • आप गुमनाम रूप से इंटरनेट का उपयोग कर सकते हैं।
  • डार्क वेब के जरिए आप फाइलों को सुरक्षित तरीके से शेयर कर सकते हैं।
  • यह उन छात्रों के लिए एक अच्छी जगह है जो किसी चीज़ के बारे में गहन शोध करना चाहते हैं क्योंकि यहाँ बहुत सारी अध्ययन सामग्री उपलब्ध है।

डार्क वेब पर बैन क्यों नहीं है? (Why Is The Dark Web Not Banned In Hindi)

डार्क वेब के बारे में पढ़ने के बाद आपके मन में यह सवाल भी आ रहा होगा कि डार्क वेब को बैन क्यों नहीं किया जाता। तो इसका उत्तर है कि डार्क वेब पूरी तरह से अवैध नहीं है, इसके कुछ कानूनी कार्य भी हैं। और डार्क वेब यूजर को अपनी पहचान बताए बिना इंटरनेट का उपयोग करने की अनुमति देता है, इसलिए इसका उपयोग देश की सरकार, सेना, बड़ी कंपनियों द्वारा भी किया जाता है।

साथ ही डार्क वेब का इस्तेमाल कर यूजर को ट्रैक करना भी काफी मुश्किल होता है। इन सभी कारणों से डार्क वेब को पूरी तरह से प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता है।

टोर ब्राउज़र क्या है?

टॉर ब्राउजर पहला ब्राउजर है जिसने डार्क वेब को एक्सेस करने योग्य बनाया। डार्क वेब एक्सेस करने वाले बहुत से लोग टोर ब्राउज़र की मदद से ऐसा करते हैं। और इसका मुख्य कारण टोर की सुरक्षा है। टॉर का मतलब द ओनियन रूटिंग प्रोजेक्ट है जिसे अमेरिकी नौसेना द्वारा विकसित किया गया था। इसे 2004 में जनता के लिए उपलब्ध कराया गया था।

टोर ब्राउजर गूगल क्रोम, फायरफॉक्स जैसे अन्य सामान्य ब्राउजरों से अलग है। क्योंकि यह आपके डिवाइस से वेब तक डायरेक्ट रूट का उपयोग नहीं करता है। इसके बजाय, टोर एन्क्रिप्टेड सर्वर का उपयोग करता है, जिसे नोड्स के रूप में जाना जाता है।

सरफेस वेब या क्लियर वेब क्या है? (Surface Web Kya Hai | Clear Web Kya Hai)

सरफेस वेब को क्लियर वेब/क्लियर नेट भी कहा जाता है। यह सामान्य इंटरनेट / वर्ल्ड वाइड वेब को संदर्भित करता है, जहां आप अपने दैनिक जीवन में जो कुछ भी करते हैं, जैसे जीमेल, फेसबुक, ट्विटर, अमेज़ॅन या फ्लिपकार्ट से ऑनलाइन शॉपिंग।

सभी वेबसाइट और वेब पेज जिन्हें गूगल जैसे सर्च इंजन द्वारा खोजा जा सकता है, सभी को क्लियर नेट या सरफेस वेब कहा जाता है। यह पूरे इंटरनेट का केवल 4% है।

डीप वेब क्या है? (Deep Web Kya Hai)

डीप वेब इंटरनेट के उन बाकी हिस्सों को कहा जाता है, जो सरफेस वेब के बाद आता है। सर्च इंजन इन डीप वेब साइट्स को इंडेक्स नहीं कर सकते। इनमें कई वेब पेज शामिल हैं जैसे सदस्यता लॉगिन, सभी कंपनी और संगठन के वेब पेज आदि। डीपवेब के अधिकांश हिस्से में कोई अवैध चीज नहीं होती है।

डार्क वेब या डार्क नेट क्या है? (Dark Web Kya Hai | Dark Net Kya Hai)

डार्क वेब डीप वेब का एक छोटा सा हिस्सा है जहां सभी अवैध चीजें उपलब्ध हैं। अधिकांश डार्क वेब एन्क्रिप्टेड हैं, इसलिए उन्हें केवल उस ब्राउज़र से एक्सेस किया जा सकता है जो उन्हें खोल सकता है, जैसे टोर ब्राउज़र।

डार्क नेट की वेबसाइटें ट्रेडिशनल सर्च इंजन में नहीं मिल सकती हैं। इन डार्क नेट में आप ड्रग्स, नकली सामान, हथियार, साथ ही हैकिंग साइट्स, एक्स-रेटेड साइट्स, बिटकॉइन खरीदने और बेचने जैसी सभी अवैध चीजें आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

डीप वेब और डार्क वेब क्यों मौजूद हैं? (Why Do Deep Web And Dark Web Exist In Hindi)

डीप वेब और डार्क वेब दोनों ही गोपनीयता और Anonymity प्रदान करते हैं।

डीप वेब आपकी व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखने में मदद करता है जिसे आप निजी रखना चाहते हैं।

उदाहरण के लिए – जब आप अपने बैंक खाते तक पहुंचते हैं, तो यह पूरी तरह से निजी नहीं होता है। यहां बैंक को तो पता होता है कि आपने अपना खाता एक्सेस कर लिया है। जबकि डार्क वेब पूरी Anonymity के साथ काम करता है। आप जो भी काम करते हैं, वह आपका व्यवसाय है। किसी को कुछ पता नहीं लगता। यदि आप कुछ सावधानियां बरतते हैं तो आपको बिल्कुल भी ट्रैक या ट्रेस नहीं किया जा सकता है।

कुछ लोगों के लिए, गोपनीयता इंटरनेट पर एक बड़ी चिंता है। उन्हें अपनी सभी व्यक्तिगत जानकारी पर नियंत्रण की आवश्यकता होती है जो मानक इंटरनेट सेवा प्रदाता और वेबसाइटें अक्सर हमसे एकत्र करती हैं।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी एक मुद्दा है और कुछ लोग इस गोपनीयता और Anonymity के बारे में बहस करेंगे। यही कारण है कि कानून का पालन करने वाले नागरिक टोर ब्राउज़र की गोपनीयता पर अधिक ध्यान देते हैं।

Anonymity के अपने सकारात्मक प्रभाव होते हैं – जैसे कि अपने विचारों को बहुत आसानी से व्यक्त करने में सक्षम होना जो अलोकप्रिय हो सकता है, लेकिन अवैध नहीं। और डार्क वेब भी ऐसी चीजों को संभव बनाने में मदद करता है।

डार्क वेब का सुरक्षित रूप से उपयोग कैसे करें?

वेब का यह हिस्सा पूरी तरह से छिपा हुआ है और कुछ कारणों से अवैध भी है। इसलिए आप यहां तुरंत लॉग इन नहीं कर सकते हैं।

जब आप इन डार्क वेबसाइटों पर जा रहे हों तो आपको इसकी सुरक्षा के लिए कुछ विशेष ध्यान देना होगा। जैसे कि जब आप इन डार्क वेबसाइटों पर जा रहे हों तो आपको अपने माइक्रोफ़ोन और कैमरे को ढंकना चाहिए और कभी भी अपने व्यक्तिगत विवरण का उपयोग नहीं करना चाहिए।

अगर आप इन डार्क वेबसाइट्स का सही इस्तेमाल कर रहे हैं तो यह बहुत अच्छी बात है। लेकिन साथ ही अगर आपकी नीयत ठीक नहीं है तो ध्यान रखें कि पुलिस की नजर हमेशा आप पर रहती है। इसलिए डार्क वेब में तभी प्रवेश करें जब अत्यंत आवश्यक हो, अन्यथा नहीं। या जब आपके इरादे अच्छे हों।

डार्क वेब में क्या किया जाता है?

डार्क वेब में ऐसे काम होते हैं जिनकी कल्पना करना नामुमकिन है। लेकिन आपके मन में यह सवाल जरूर आया होगा कि डार्क वेब में क्या किया जाता है। तो चलिए आपको बताए है जिससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि यह डार्क वेब कितना खतरनाक है।

  • हथियारों की लेनी-देनी
  • नशीले पदार्थों की तस्करी
  • डार्क वेब और ऐप हैकिंग
  • विलुप्त होने के कगार पर जानवरों की खाल
  • लोगों के बैंक खाते के विवरण बेचना
  • दूसरे देश की नागरिकता दिलाना
  • फर्जी पासपोर्ट
  • चाइल्ड पोर्नग्राफी
  • मानव अंग तस्करी
  • पशु मांस आदि पकाने पर ट्यूटोरियल।

इनके अलावा भी डार्क वेब पर कई तरह के घिनौने काम किए जाते हैं।

FAQ

डार्क वेब को क्या कहते है?
डार्क वेब को डार्क नेट भी कहा जाता है।

सरफेस वेब को क्या कहते है?
सरफेस वेब को क्लियर वेब/क्लियर नेट भी कहा जाता है।

डार्क वेब के लिए किस वेब ब्राउज़र की जरुरत पड़ती है।
डार्क वेब के लिए टोर वेब ब्राउज़र की जरुरत पड़ती है।

डार्क वेब के किससे एक्सेस किया जा सकता है?
डार्क वेब टोर वेब ब्राउज़र से एक्सेस किया जा सकता है।

डीप वेब क्या है?
डीप वेब इंटरनेट के उन बाकी हिस्सों को कहा जाता है, जो सरफेस वेब के बाद आता है।

डार्क वेब क्या है?
डार्क वेब डीप वेब का एक छोटा सा हिस्सा है जहां सभी अवैध चीजें उपलब्ध हैं।

सरफेस वेब क्या है
यह सामान्य इंटरनेट / वर्ल्ड वाइड वेब को संदर्भित करता है, जहां आप अपने दैनिक जीवन में जो कुछ भी करते हैं, जैसे जीमेल, फेसबुक, ट्विटर, अमेज़ॅन या फ्लिपकार्ट से ऑनलाइन शॉपिंग।

निष्कर्ष

उम्मीद है की आपको यह जानकारी (What Is Dark Web In Hindi) पसंद आयी होगी। अगर आपको यह लेख (What Is Dark Web In Hindi) मददगार लगा है तो आप इस लेख (What Is Dark Web In Hindi) को अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें। और अगर आपका इस लेख (What Is Dark Web In Hindi) से सम्बंधित कोई सवाल है तो आप नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स का इस्तेमाल कर सकते हैं।

लेख के अंत तक बने रहने के लिए आपका धन्यवाद

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